रविवार, फ़रवरी 12, 2023

💞 दिल 💞










ऐ मेरे दिल तू 

क्यूँ दूसरों के लिए 

जीना चाहता है

इस दुनिया में नही कोई

तुझे समझने वाला

तू किसी के लिए 

कितना भी कर ले

किसी को नही 

परवाह तेरी

दिलों से खेलना

और तोड़ देना 

ये है आदत 

ज़माने की

कोई नही समझता 

आज के युग में 

कीमत तेरी

फिर क्यूँ खुद को 

तकलीफ देता है

टूट कर फिर क्यूँ

छुप-छुप के रोता है

इसलिए कहती हूँ

अब तो संभल जा

खुद से प्यार कर ले

खुद पर ऐतबार कर ले

खुद अपनी आवाज सुन

खुद से मुलाकात कर ले

औरों की चिंता छोड़

मस्त रहना सीख ले


✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )

शुक्रवार, फ़रवरी 10, 2023

💞 दिल तू खुद से प्यार करना सीख ले 💞











तूने खुद से ज्यादा प्यार औरों से किया।

ऐ दिल तू खुद से प्यार करना सीख ले।


दो पल साथ अपने भी बिता ले तू ज़रा।

खुद से भी तू गुफ़्तगू करना सीख ले।


हितैषी ना मिलेगा दूसरा बेहतर कोई।

खुद से भी तू रिश्ता बनाना सीख ले।


लोग कहते हैं कहेंगे ना तू परवाह कर।

तू खुद पर भी ऐतबार करना सीख ले।


वे आंकेंगे तुझको सदा अपनी नज़र से।

तू खुद पर भी यकीन रखना सीख ले।


दुनिया लाख कोशिश कर ले तू डरना नही।

अपने हौंसले तू बुलंद रखना सीख ले।


ऐ राही अपने लिए जो मंजिल चुनी तूने।

तू अविराम उस पर बढ़ते रहना सीख ले।


सबको खुश रखने की ना तू फिक्र कर।

तू अपनी मौज में मस्त रहना सीख ले।


✍️ कविता कोठारी ( कोलकाता, पश्चिम बंगाल )

गुरुवार, फ़रवरी 09, 2023

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन शब्द सृजन साहित्यिक महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा शब्दों के महत्व तथा विशेषता को दर्शाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन शब्द सृजन साहित्यिक महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को दस अलग-अलग शब्दों के विकल्प देकर उनमें से किन्हीं दो शब्दों का विषय के तौर पर चयन करके उन विषयों पर आधारित रचनाएं लिखने के लिए कहा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत कर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए और महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। महोत्सव में डाॅ० कंचन शुक्ला ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश ), सीमा कौशिक 'मुक्त' ( फरीदाबाद, हरियाणा ) और पूनम त्रिपाठी ( कोलकाता, पश्चिम बंगाल ) की रचनाओं ने समूह का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। इस महोत्सव में सम्मिलित सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत साहित्य भूषण' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने शब्दों के महत्व तथा विशेषता के बारे में बताते हुए लोगों को शब्दों का संभलकर व उचित प्रयोग करने ‌की सलाह दी और महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मान पाने वाली सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी रचनाकारों को समूह द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक महोत्सवों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम देवेन्द्र कुमार मिश्रा, सीमा कौशिक 'मुक्त', डॉ० कंचन शुक्ला, पूनम त्रिपाठी, पूजा गुप्ता, मधु श्रीवास्तव रचनाकारों के रहे।

बुधवार, फ़रवरी 08, 2023

🦚 गृहिणी 🦚







गृहिणी अपनी 

खुशी के लिए 

कहाँ जी पाती है

घर परिवार की

खुशी के लिए 

खुद अपनी खुशी

ना जाने कहाँ

भूल जाती है

अपने दर्द छुपाकर

सबके लिए मुस्कुराती है


सबको सम्मान देते-देते

खुद के स्वाभिमान को भी

वो तो भूल जाती है

गृहिणी अपनी

खुशी के लिए

कहाँ जी पाती है


सुबह से रात तक

चकरघिन्नी की तरह

सबकी फरमाइशें

पूरी करने में

अपने सपनों को 

भूल जाती है

गृहिणी अपनी 

खुशी के लिए

कहाँ जी पाती है


खुद से ज्यादा 

ससुराल वालों

का ख्याल रखती है

भूलकर मायका 

ससुराल में रम जाती है

गृहिणी अपनी 

खुशी के लिए 

कहाँ जी पाती है


कभी बहु, कभी माँ बनकर 

सबके सुख-दुख लेकर

अपने सब फर्ज़ निभाती है

गृहिणी अपनी

खुशी के लिए 

कहाँ जी पाती है


✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )

🦚 क्षणिक सुख की खातिर 🦚










कैसा ये

वासना का खेल 

खेल गया तू

एक बेटी को 

जीते जी 

मार गया तू

अपने क्षणिक 

सुख की खातिर

आत्मा उसकी 

छलनी कर गया तू


क्यों नही सोचा तूने 

ये कुकर्म 

करने से पहले

कि ये बेटी भी 

इज्जत है किसी

के घर-आंगन की

कैसे जी पायेंगे माँ-बाप 

बेटी को इस हाल में देख

मरने को मजबूर

कर देगा ये समाज 

उन्हें घृणा भरे ताने दे देकर


अरे ओ 

हवस के अन्धे

क्यों छला तूने उसे 

प्यार के नाम पर

क्यों किया खून

उसके विश्वास का

तुझ जैसे दरिंदे ही

प्यार शब्द की

पवित्रता को

बदनाम करते हैं

दिखा कर सपने प्यार के

बेटियों को बर्बाद करते हैं


✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )

मंगलवार, फ़रवरी 07, 2023

🦚 वक्त और जज्बात मेरे 🦚







हाँ नही मिला वक्त

उन अल्फाजों को

जो बता सकते

हमारे जज्बात

कि हमे तुमसे है

कितनी मोहब्बत

टूट के बिखरे हैं अरमां

हर बार टुकड़ों में

पर नही मिला 

कोई ऐसा जो 

जोड़ पाता 

मेरे टूटे हुए 

अरमानों को


दर्द में भीगी थी 

तन्हाई मेरी

और हंसने-हंसाने वाली 

महफिले भी थी साथ 

पर नही आ रहा था

रास कुछ भी 

कि कहां जाए 

और किसको बताए 

कि मेरे अंदर 

जो उमड़ रहा है

दर्द का सैलाब

उसे है कोई 

जो समझ सके

शायद नही है कोई 

और ना ही था कोई


कुछ था ऐसा वक्त 

मेरा कि हम 

उस वक्त में थे ऐसे 

जैसे हों बिल्कुल बेवक्त जैसे 

अब जो वक्त मिला भी है ना 

वो मुझे लगता ही नही

कि ये वो वक्त है

अब वो वक्त

मेरे लिए एक मज़ाक है

सुना ! तुमने एक मज़ाक


✍️ पूजा गुप्ता ( सीतापुर, उत्तर प्रदेश )

🦚 बरसात की भीगी रातों में 🦚







बरसात की भीगी रातों में

गीली लकड़ी-सा सुलगा मन

इस करवट भी बेचैनी और  

उस करवट भी थी तड़पन

बरसात की भीगी-----


बरसात छमाछम जब बरसी  

उसने इस दिल पर दी थपकी

बदरा टप-टप नैना टप-टप

ये रूह हमारी फिर तरसी

बरसात की भीगी-----


तुम किसी बहाने आ जाते

न ख़्वाबों में भी थी अड़चन

मन दर्द विरह का न भूला

चाहें नैन खुले थे या थे बंद

बरसात की भीगी-----


खोजा दिल तो तुम हाज़िर थे

फिर क्यों उमड़ी थी तड़पन

साँसें मेरी तुम चला रहे थे  

और जारी भी थी धड़कन

बरसात की भीगी रातों में ----

             

✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ( फरीदाबाद, हरियाणा )

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा सावन आगमन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को सावन ...