मंगलवार, मई 24, 2022

👸जगत कल्याणी👸







घर-आंगन स्वर्ग-सा बनाना, जानती है प्रिया जीवनसंगिनी,

परिवार बगिया महकाना, जानती है सुशीला अर्धांगिनी।।


सुकोमल दया, करुणा, क्षमा की वह प्रतिमूर्ति,

नारी, परम प्रभु की सुंदर, अनुपम, उत्कृष्ट कृति।।


रेशम बंध मृदुल नेहभाव, माणिक मोती माला पिरोए,

आपसी मनमुटाव, दंभ, अहंकार से रिश्तों को बचायें।।


सहेजे सहज ही त्याग, संयम, समर्पण, सहयोग भावना,

फले, फूले, खुशहाल रहे छोटा-सा संसार, मंगल कामना।।


सबकुछ करे न्योछावर, अपनों के लिए सदा सादर,

स्नेह मोती लुटाये, बरसाये रिमझिम रिमझिम प्यार-दुलार।।


व्यक्तित्व निखारे, घरद्वार सजाये कामयाबी की बंदनवार,

आंधी तूफान में चट्टान-सी अटल, अंधियारे में दीप उजियार।।


संस्कार बीज करे अंकुरित, मन मानस पुष्प सुरभित सजाये, 

साक्षर, सबला, स्वावलंबी, सत्धर्मी नारी कल्याणी कहलाये।।


एक दूजे के लिए जीना, धर्मानुराग, प्रेमभाव सिखाये,

आपदा-विपदा में साथ न छोड़े, एकता में बल बतलाये।।


नर-नारी मिलन खिले संसार, युगल आदर-सम्मान पाये,

सजनी संग साजन, सुरमई, मधुरिम जीवनगीत गुनगुनाये।।

                

 ✍️चंचल जैन ( मुंबई, महाराष्ट्र )

शुक्रवार, मई 20, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन 'पुनीत रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' में रचनाकारों ने मन के भावों को किया प्रस्तुत।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा रचनाकारों के उत्साहवर्धन हेतु एवं उनके मन के भावों को आदर देने के उद्देश्य से ऑनलाइन 'पुनीत रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को अलग-अलग विषयों के विकल्प देकर उसमें से किसी एक विषय का चयन करके चयनित विषय पर आधारित रचना लिखने के लिए कहा गया था। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से अपने मन के भावों को प्रस्तुत कर ऑनलाइन 'पुनीत रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' की शोभा में चार चाँद लगा दिए। इस कार्यक्रम में समूह द्वारा अपने पिछले ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में मंच की शोभा बढ़ा चुके रचनाकारों को विशिष्ट साहित्यिक शख्सियत के तौर पर जोड़कर ऑनलाइन 'पुनीत विशिष्ट रचनाकार' सम्मान देकर सम्मानित किया गया और साथ ही समूह से पहली बार जुड़कर अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने वाले रचनाकारों को ऑनलाइन 'पुनीत रचनाकार' प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने ऑनलाइन 'पुनीत रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' में प्रतिभागी रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मान पत्र और प्रशस्ति पत्र पाने वाले सभी रचनाकारों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने रचनाकारों को आने वाले ऑनलाइन साहित्यिक महोत्सवों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम सोनी कुमारी, स्मिता सिंह चौहान, प्रिया अवस्थी शर्मा, सीमा मोटवानी, संध्या शर्मा, ज्योति चौधरी, रीना अग्रवाल, सुभाष सेमल्टी 'विपी', गरिमा, ज्योति पांडे, अर्चना श्रीवास्तव, प्राप्ति सिंह, सावित्री मिश्रा, सरोज कंचन, नंदिनी ठाकुर, पूजा गुप्ता, पूजा सिंह रघुवंशी, कोमल वर्मा रचनाकारों के रहे।



गुरुवार, मई 19, 2022

🌻दर्द की किताब है मेरी जिंदगी🌻







मेरी हर इबादत रंगीन लगने लगी
आने से तुम्हारे जिंदगी संवरने लगी
तेरे आने से पहले हर राह सीधी थी
ना जाने ये जिंदगी अब किधर मुड़ने लगी ?

तेरे प्यार मे दिनों-दिन दीवानगी बढ़ती है
भूख लगे ना प्यास बस तेरी चाहत पलती है
तेरे जिस्म की खूशबू मे ये रूह मिलती जाती है
तेरे आने की खुशी मे ये आँखें नम सी लगने लगी
ना जाने ये जिंदगी अब किधर मुड़ने लगी ?

तुझ को बाहों मे भरने की अब ख्वाहिशें जागती हैं
देख कर तुम्हारी प्यारी सूरत मन मे उमंगे नाचती हैं
रिमझिम सी बारिश जब पेड़ों पर गिरने लगी
तब पत्तों पे गिरि बूंदें मुझे शबनम सी लगने लगी
ना जाने ये जिंदगी अब किधर मुड़ने लगी ?

महज एक कल्पना में है प्यार का एहसास 
जब की सच्चाई तो ये है कि 
खुशियों से नाराज है मेरी जिंदगी
प्यार की मोहताज है मेरी जिंदगी
हँस लेती हूँ लोगों को दिखाने के लिए
वरना दर्द की किताब है मेरी जिंदगी।

✍️ सावित्री मिश्रा ( झारसुगुड़ा, ओड़िशा )

बुधवार, मई 18, 2022

🌻जिंदगी कभी बेवफ़ा नहीं होती🌻












जिंदगी कभी बेवफ़ा नहीं होती, बेवफ़ा तो हम होते हैं..!
जो अक्सर उससे (जिंदगी) उसकी सांसें छीन लिया करते हैं..!! 

जीते तो हैं मुजरिमों की तरह हम अक्सर यहाँ..! 
पर मर जाते हैं एक दिन बेगुनाहों की तरह..!!

खुशियां कहाँ जीती है इन गमों में..!
ये गम ही तो है जो उन खुशियों में जीया करता है..!! 

सपनें कहाँ मिलते है इन उजालों से हमें..!
ये सपनें ही तो है जो अक्सर अंधेरों से मिला करते है हमें..!! 

दफ़न हो जाते वादें भी अक्सर यहाँ..!
पर ये दिल ही तो है जो उन रिश्तों के बोझ भी उठा लिया करता है..!!

धुंधली पड़ जाती है यादें भी अक्सर यहाँ..!
पर ये अपने ही तो हैं जो अपनी नज़रों में भी हमारी छवियों को बसा लिया करते हैं..!!

जिंदगी कभी बेवफ़ा नही होती, बेवफ़ा तो हम होते हैं..!
जो अक्सर उससे (जिंदगी) उसकी सांसें छीन लिया करते हैं..!!
 
                ✍️ कोमल वर्मा ( धनबाद, झारखंड )



🌻कर्म ही है सबसे बड़ा🌻







कृष्ण कहते हैं, कर्म ही है सबसे बड़ा,

जैसा समझा, वैसी ही धारणा बन गई। 

परिश्रमी पिपीलिका, पर्वतों तक चढ़ी, 

कर्मवीरों की तब वही प्रेरणा बन गई। 

कृष्ण कहते हैं, कर्म ही है सबसे बड़ा।।


कुछ करने की हसरत हो दिल में अगर,

कोई अवरोधक हो पथ से डिगाता नही

हौंसला हो अगर तो कुछ मुश्किल नही,

कश्तियों को कोई तूफां है डुबाता नही।

चट्टानें अचल की जो कभी दुश्कर रही,

दशरथ मांझी की वही साधना बन गई। 

कृष्ण कहते हैं, कर्म ही है सबसे बड़ा।। 


है स्वेद से सींचता जब कृषक खेत को,

रत्नगर्भा, रत्नों को है ये उगलती तभी।

पड़ती है जो प्रभाकर की प्रखर-रश्मियाँ,

महिका, महीधर की भी पिघलती तभी।

सगर पुत्रों का तरण, जब मनोरथ बना,

जाह्नवी, भगीरथ की आराधना बन गई।

कृष्ण कहते हैं, कर्म ही है सबसे बड़ा।। 


परिस्थिति थी कहाँ, कोई बाधक बनी,

गुरू-प्रतिमा एकलव्य की साधक बनी।

जब लगन की अगन थी हृदय में जली,

गुरू-शिष्य की उत्तम भावना बन गई।

कृष्ण कहते हैं, कर्म ही है सबसे बड़ा।। 


 ✍️ सरोज 'कंचन' ( कानपुर, उत्तर प्रदेश )

🌻तेरे इश्क का दर्द🌻








आंखो में 
तेरे इश्क का 
दर्द लिए 
गुजर रहे 
हम उन्ही राहों से 
जिनमे 
साथ चले थे 
तुम्हारा दामन थामे 

ये राहें
ये मील के पत्थर 
ये गुलज़ार बगीचे
ये आबो हवा 
ये खुश्बू 
तुम्हारे करीब होने का 
अहसास कराती है

लेकिन तन्हाइयों में 
मेरे दिल की धड़कन 
तुम्हारी कमी का 
अहसास करती हैं 

इंतजार करते-करते
पथरा गई निगाहें मेरी 
जिन निगाहों में बसने का 
तुम ऐलान करते थे

इश्क़ था तुमसे 
मोहब्बत भी थी 
जब तुम थे
जीवन में 
कुछ कमी ना थी 

इश्क़ अश्क बन गया
मोहब्बत दीवानी हो गई 
सब कुछ है 
कहने को 
बस तुम्हारी ही कमी है 

तुमसे मिलने 
और
बिछड़ने से 
एक सीख मिली 
इश्क है 
तो नज्म है
दिल है तो 
दर्द है 

तुम जीवन नही
सिर्फ दर्द बन के 
रह गए

✍️ प्राप्ति सिंह ( हैदराबाद, तेलंगाना )


🌻प्रकृति की जीत🌻








आज प्रकृति इतराती है 
निज गौरव पर इठलाती है
मानव ने किया ना कभी चिंतन
सदियों से किया इसका दोहन
काटा वन को रौंदे पर्वत
पाटी नदियां पहुंचा नभ तक
सब जीव जंतु खाए इसने
फिर भी मन रहा नही वश में
डर खोकर यह बढ़ता ही गया
सत्ता ईश्वर की भूल गया
जब धरती डोली गरजा अंबर
सरिता, सागर भी चले उफनकर
एक जीव (कोरोना) ने की इसकी आफत
तब भूला ये अपनी ताकत
अब चक्षु खुले और मिला ज्ञान
है प्रकृति के आगे हारा विज्ञान

 ✍️ अर्चना श्रीवास्तव ( गोरखपुर, उत्तर प्रदेश )

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...