घर-आंगन स्वर्ग-सा बनाना, जानती है प्रिया जीवनसंगिनी,
परिवार बगिया महकाना, जानती है सुशीला अर्धांगिनी।।
सुकोमल दया, करुणा, क्षमा की वह प्रतिमूर्ति,
नारी, परम प्रभु की सुंदर, अनुपम, उत्कृष्ट कृति।।
रेशम बंध मृदुल नेहभाव, माणिक मोती माला पिरोए,
आपसी मनमुटाव, दंभ, अहंकार से रिश्तों को बचायें।।
सहेजे सहज ही त्याग, संयम, समर्पण, सहयोग भावना,
फले, फूले, खुशहाल रहे छोटा-सा संसार, मंगल कामना।।
सबकुछ करे न्योछावर, अपनों के लिए सदा सादर,
स्नेह मोती लुटाये, बरसाये रिमझिम रिमझिम प्यार-दुलार।।
व्यक्तित्व निखारे, घरद्वार सजाये कामयाबी की बंदनवार,
आंधी तूफान में चट्टान-सी अटल, अंधियारे में दीप उजियार।।
संस्कार बीज करे अंकुरित, मन मानस पुष्प सुरभित सजाये,
साक्षर, सबला, स्वावलंबी, सत्धर्मी नारी कल्याणी कहलाये।।
एक दूजे के लिए जीना, धर्मानुराग, प्रेमभाव सिखाये,
आपदा-विपदा में साथ न छोड़े, एकता में बल बतलाये।।
नर-नारी मिलन खिले संसार, युगल आदर-सम्मान पाये,
सजनी संग साजन, सुरमई, मधुरिम जीवनगीत गुनगुनाये।।
✍️चंचल जैन ( मुंबई, महाराष्ट्र )






