माहवारी, मासिक धर्म या पीरियड लड़कियों के शरीर में घटने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसके विषय में अज्ञानता पसरी है या कहे की जानबूझकर भी खुलकर बाते करने में सभी झिझक महसूस करते है, लेकिन माहवारी कोई छिपाने और झिझक का विषय नही बल्कि जागरूकता व कुछ मायने में सतर्कता का विषय है, जिसमें नवयुवती पहली बार किसी नई बात जो सब लड़कियों पर गुजरती है, उस पर भी गुजरने वाली अनोखी घटना है, वास्तव में एक बेटी के संबंध में यह परिवार के लिए खुशी की बात होनी चाहिए।
लेकिन अब माता-पिता बेटी हेतु डरते और ज्यादा सतर्क रहते हैं क्योंकि असमाजिक तत्वों के चपेट में आने पर बेटी के गर्भधारण की चिंता भी है, ऐसे में अब एक बेटी पर अनावश्यक दबाव आ जाता है और प्रतिबंधों का तांता सा लग जाता है, और बेटी ने अब इस दुनिया में कुछ असहयोग, डर, संकोच, झिझक और बहुत कुछ अलग सा चारो और देखना शुरू किया है।
यह कोई बीमारी तो नहीं बल्कि शारीरिक, प्राकृतिक, क्रिया है, हर माता-पिता अपने बच्चे को बड़ा होता देखना चाहते है, उनके लिए यह खुशी की बात है की बेटी ने एक दौर पार कर लिया है, फिर इसके विषय में हमारी सोच इतनी संकीर्ण और नीरस क्यों है ? क्यों एक बेटी अलग सा महसूस करे और अपनी अवस्था के बारे खुलकर बाते न करे यह प्रश्नचिन्ह है।
अतः हर बेटी और महिला इस बात को छिपाने को मजबूर है इन्हे कौन मजबूर बनाता है, कोई नही सिर्फ हमारी सोच और कुछ नही। हमारे देश में इस विषय पर पर्याप्त गोपनीयता बरती जाती है, पहले भी आज से अधिक गोपनीयता थी और आज भी इस विषय पर बात करना अभद्र ही माना जाता है कारण अज्ञानता है और जागरूकता की कमी।
माहवारी के विषय मे बहुत से मिथक और भ्रांतियां -
भ्रांतियां -
* लड़किया और महिलाओं का धार्मिक कार्यों करने पर प्रतिबंध होता है।
* इस समय लड़कियों व महिलाओं को अशुद्ध माना माना जाता है।
* पूजा स्थलो, रसोई घरों में जाना निषेध होता है।
* 7 दिनों के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाता है।
* पूजा करना, पूजा स्थल, पूजा के समान, धर्मग्रंथों चूल्हे छूना यहां तक की खाना बनाना भी अशुभ माना जाता है और वर्जित भी है।
मिथक -
* खाने की कुछ चीजों के सेवन पर प्रतिबंध जैसे दही, अचार, मांसाहार भोजन, खट्टी चीजें
* कुछ खाद्य पदार्थों को बनाने में भी प्रतिबंध होता है जैसे
अचार, बड़ी, अनरसा आदि
* सूती कपड़े का प्रयोग सही माना जाता है।
* माहवारी के कपड़े को मवेशियों द्वारा खाने से लड़किया और महिलाएं गर्भ धारण नही कर सकती और श्रापित हो जाती है।
* कपड़े को उपयोग के बाद गाड़ा जाना चाहिए।
* माहवारी के कपड़े को सूखते कोई देखे और खुले में सूखाने को अभद्र और असभ्य माना जाता है।
* माहवारी के कपड़े को जादू टोने के लिए उपयोग किया जाता है।
* बड़ो का मानना है कि इस अवस्था में शैतानी ताकतें जल्दी लड़कियों व महिलाओं पर हावी होती है।
* साथ ही माहवारी के कपड़े जलाने से महिलाए गर्भ धारण नही कर सकती।
ये सब मिथक और भ्रांतियों का हमने भी स्वयं सामना किया है और माहवारी की इसमें उल्लेखित सभी मजबूरियों से खुद भी हम गुजर चुके है और आज भी लोग इन बातो का सामना करते है। हद तो तब हो जाती है जब आज भी ये भ्रांतियां ओर मिथक प्रचलित है हालांकि शिक्षित परिवारो में इस तरह के मिथक की जगह ग्रामीण इलाको से कुछ कम ही होती है।
लेकिन आज के युग में एक लड़की को इसकी पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है जबकि आजकल बलात्कार कुछ अधिक होते है
और छोटे बच्चे जो माहवारी के शुरुवाती दौर में होते हैं उन्हें असामाजिक तत्वों के गतिविधियों का उनकी बुरी चाल का बेड टच और गुड टच का ज्ञान नही होता न ही उसके दुष्परिणामों का ज्ञान होता है।
माहवारी के शुरुवाती दौर मे खुद को संभालना और माहवारी के चुनौतियों का सामना करना व हरेक अटकलों से निपटने में एक नवयुवती को सक्षम होना चाहिए। ऐसे समय में डरने और झिझकने के बजाए किसी स्त्री से और विपरीत परिस्थितियों में किसी विश्वासपात्र पुरुष से भी सहयोग लेना स्वीकार करना चाहिए बिल्कुल किसी टीवी के एड की तरह, ताकि माहवारी के समय विपरीत परिस्थितियों का कैसे सामना करना चाहिए जब बड़े उनके साथ या आस पास न हो।
इस लेख का उद्देश्य माहवारी के विषय में प्रचलित मिथक और भ्रांतियों को झुठलाना है और महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव साथ ही माहवारी के विषय में जागरूकता की ओर एक कदम है। ये मिथक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गलत है। ताकि इस विषय को अन्य स्वाभाविक क्रियाओ की तरह ही स्वाभाविक माना जाए जैसे की पाचन क्रिया, श्वसन क्रिया वैसी ही माहवारी प्रजनन क्रिया है।
पूर्व में माहवारी हेतु सूती कपड़े का उपयोग किया जाता था। अब इस हेतु सेनेटरी का उपयोग किया जाता है सैनेटरी को पैड भी कहा जाता है। आज सभी क्षेत्रों में पूर्ण जागरूकता है फिर भी आज भी दुकानों में सेनेटरी खरीदते समय और दुकानदारों द्वारा सेनेटरी देते समय झिझक और गोपनीयता देखने को मिलती है इसे हम अन्य सामान की तरह सामान्य क्यों नही मान सकते ?
* माहवारी, मासिक चक्र पीरियड का शूरु होना -
मासिक धर्म की क्रिया वह है जब कोई लड़की किशोरावस्था में प्रवेश करती है लगभग 11 से 14 वर्ष की लड़कियो में उनके अंडाशय इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन नामक हार्मोंस उत्पन्न करने लगते जैसी हार्मोंस की वजह से हर महीने के कुछ कालखंड में गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है कुछ अन्य हार्मोंस अंडाशय को एक अनिषेचित डिंब उत्पन्न करने और उत्सर्जित करने का संकेत देता हैं। महीने के इस कालखंड में जब कोई लड़की या महिला यौन संबंध नही बनाती हैं तब गर्भाशय की वह परत मोटी होकर जो गर्भावस्था के लिए तैयार हो रही थी टूट कर रक्त स्राव के रूप में रक्त और टिश्यू के साथ गर्भाशय से होकर योनि से उत्सर्जित होती है माहवारी सामान्यतः 5 से 7 दिनों तक चलती है। इस प्रक्रिया के शुरुवात में और प्रक्रिया के दौरान लड़कियो व महिलाओं को शारीरिक हार्मोनल बदलाव से गुजरना पड़ता है,
* आम तौर पर होने वाली परेशानियां निम्न है-
* कमर, पैर में दर्द
* पेट में ऐंठन
* उल्टी, चक्कर आना
* कमजोरी चिड़चिड़ापन
* सिरदर्द
* गैस, पेट साफ न होना
* कुछ लड़कियो व महिलाओं को रक्तस्राव ज्यादा कुछ को कम होता है
वस्तुतः मासिक चक्र 28 दिनों का होता है लेकिन यह 21 से 35 दिनों के बीच कभी भी हो सकता है।
माहवारी हर महीने पिछली तारीख को ही आती हैं, भिन्न कारणों से तारीख में बदलाव की संभावना होती है।
* मासिक चक्र 16 साल तक न आने पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
* कहीं शरीर के अंदरूनी स्थानों में खून का जमाव तो नही हो रहा या जनन अंगो में या हार्मोन ग्रंथि में कोई समस्या तो नही है।
* माहवारी के लाभ -
* माहवारी से उत्पन हार्मोंस शरीर को स्वस्थ रखते हैं।
* हर महीने ये हार्मोनस शरीर को गर्भधारण हेतु तैयार करते है।
* शुरुवाती दिनों में एस्ट्रोजन नमक हार्मोन बढ़ना शुरू होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
* इस हार्मोंस के कारण गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर रक्त और टिश्यू की परत बनती है।
* कारण वहा भूर्ण पोषित हो कर तेजी से विकास कर सके।
*ये परत रक्त व टिश्यू से बनती है।
* यही रक्त और टिश्यू खराब रक्त के रूप में शरीर से उत्सर्जित होते है।
माहवारी या मासिक धर्म की जानकारी देना -
बेवजह लड़कियो और महिलाओं को डराया जाता है। जिससे वे असहज महसूस करती है। जबकि इस समय लड़कियों और महिलाओं को पर्याप्त सहायता की और जागरूकता की आवश्यकता होती हैं।
इस समय लड़कियों और औरतों को बहुत शारीरिक और मानसिक समस्या होती है। रक्तस्राव होता है जिसका सामना करने हेतु वे मानसिक रूप से तैयार भी नही होती है।
इस समय उन्हे पोष्टिक आहार, शांति, प्रेम, सहयोग की भी आवश्यकता होती हैं, बजाए इसके की उन्हे सहयोग करे भिन्न-भिन्न भ्रांतियों, मिथकों और मान्यताओं से जोड़ते और उन्हे तरह-तरह से परेशान करते और अनावश्यक प्रतिबंधित करते है। जो कि वैज्ञानिक दृष्टि के अंतर्गत नहीं है।
कई बार ऐसे में संकोचवश लड़किया घर से बाहर नही जाती, स्कूल नही जाती है जिससे पाठयक्रम पूरा करने में शिक्षको और विद्यार्थियो को परेशानी होती है, ग्रामीण इलाको में आज भी बच्चे बाहर पढ़ने जाते है, ऐसे में माहवारी के विषय में जागरूक न होने के कारण नित्यकार्य और बाहरी गतिविधियों में बाधा डाली जाती है। आज भी लोग सेनेटरी के बदले कपड़े के प्रयोग पर बल देते है।
आवश्यक कदम -
* बेवजह के मिथकों को त्यागकर माहवारी के विषय में जागरूक होने की आवश्यकता है।
* स्कूलों में बच्चे इस विषय में पर्याप्त जानकारी देना व शिक्षित करना चाहिए।
* स्कूलों मन विषय में शिक्षा पाते वक्त संकोच करते है अतः जागरूक नही हो पाते है।
अब माहवारी की जागरूकता के पक्ष में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण सभी भ्रांतियों और मिथकों को रद्द करती हैं। जागरूकता के प्रयास में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है ताकि सभी जागरूक हो सके।
विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस -
* माहवारी एक प्राकृतिक प्रजनन क्रिया है जिससे हर महिला को गुजरना होता है।
* माहवारी का चक्र सामान्यतः 28 दिनों का होता है जो 5 से 7 दिनों तक चलता है
* इसी कारण पांचवे महीने के 28 तारीख को अर्थात 28 मई को वर्ल्ड मेंसटुवल हाइजीन डे अर्थात विश्व स्वच्छता दिवस मनाया जाता है।
* जो की 2014 से शुरु किया गया।
* माहवारी के ओर जागरूक कदम -
प्रथम बार लड़की के किशोरावस्था का शुभ आगमन ही माहवारी है।
* ऐसे में हमें उन्हे प्रेम से सतर्क और जागरूक करे।
* बेटियो को इस बारे कुछ पहले ही जानकारी दे दे। ताकि बेटियां इस अवस्था को निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाए और इस अवस्था को निपटने को तैयार रहे।
* बेटियां इस संबंध में कोई भी जानकारी भविष्य में अपनी बड़ो को जरूर अवगत कर सके।
* उन्हे यौन संबंध के विपरीत परिणाम के बारे जैसे गर्भ ठहरने के बारे खुलकर बाते करे।
* ताकि शादी के पहले कम उम्र में किसी झांसे में न फंसे।
* यह अवस्था कोई पाप या बीमारी नही कोई अशुद्धता नही कोई अपवित्रता नही की हेय की दृष्टि से देखा जाए
* असामाजिक तत्वों के झांसे से बचने के बारे बताए।
सेनेटरी और कपड़े के प्रयोग में अंतर और सेनेटरी का प्रयोग -
* सेनेटरी का प्रयोग करना सिखाए।
* अन्यथा त्वचा में जलन और इन्फेक्शन की संभावना रहती हैं।
* कपड़े का प्रयोग चिकित्सीय दृष्टि से सही नही है।
* फिर भी विपरीत परिस्थितियों में उपयोग किए जाने पर स्वच्छ, सूती,कपड़े का उपयोग करना चाहिए।
* पुनः उपयोग की दशा में अच्छे से धोकर, अच्छी तरह धूप में सुखाकर फिर उपयोग करे।
* कपड़े के प्रयोग से जीवाणुओ की संभावनाएं बढ़ती है साथ ही वे आसनी से गर्भाशय में प्रवेश कर जाती है।
माहवारी में शरीर की स्वच्छता का ध्यान -
* खुद को एक्टिव रखे खेल खेले रस्सी कूदे।
* योगा करे
* दर्द आदि होने पर डॉक्टरी सलाह पर ही दवाइयों का सेवन करे।
* सेनेटरी या पैड पर्याप्त शुष्कता देती है।
* इंफेक्शन और रेसेस की समस्या भी कम होती है।
* दैनिक गतिविधियों में कोई रुकावट नही आती।
* इसका उपयोग आसान है और नष्ट करना भी।
* 3 से 4 घंटे के अंतराल में सेनेटरी बदलना चाहिए।
* प्रतिदिन नहाना चाहिए।
* शौचालय उपयोग के बाद साफ करना चाहिए।
* योनि के भीतर अन्य उत्पाद का प्रयोग खतरनाक है
* स्वच्छ वस्त्र पहने ।
* पोष्टिक आहार लें।
* नियमित गतिविधियां करे।
* पानी 7 से 8 ग्लास पिए।
* सेनेटरी उपयोग के बाद संभाल कर फेंके या नष्ट करे।
आप को डरने, घबराने, शर्माने, साथ ही गुप्त रखने की जरूरत नही अपने बड़ो को अवगत कराएं स्कूल में हो तो शिक्षक या महिला स्टाफ को अवगत कराएं। और उनकी मदद लेने में नही झिझके साथ ही उनकी सलाह माने।
जो आपको रोक-टोक करे उन्हे प्रेम से जागरूक करें
ताकि अज्ञानता वश किसी को अनावश्यक परेशानी न हो।
मासिक धर्म शुरू होने के बाद व पहले एक या दो साल तक मासिक चक्र में कुछ अंतर हो भी जाते है अपने बड़ो से आप जानकारी लेने में न झिझके।
नोट - मेरी यह रचना किताबी जानकारी व बतौर प्रैक्टिस नर्स एवम् गहन अध्ययन का परिणाम है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को माहवारी के संबंध में जागरूक करना है। इसके प्रत्येक शब्द की मौलिक सार्थकता है। इसका उद्देश्य सटीक हैं। किसी जाति, धर्म, समुदाय, देश या किसी अन्य को आघात पहुंचाना नही है। यह मिथक भ्रांतियों का वैज्ञानिक दृष्टि से सामान्य रूप से अवलोकन है व माहवारी की चुनौतियों से निपटने का उपाय और इस विषय में जागरूकता मात्र है। मैं त्रुटियों हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ। आशा है सभी उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करें।
( धन्यवाद )
✍️ प्रेममनी बासिल पीटर ( कोरबा, छत्तीसगढ़ )