सुनो ! मेरे हमसफर मेरे साथ सदा चलोगे ना ?... किसी राह पर यू अकेला तो नही करोगे ? मेरे परेशान होने पर मेरे पास बैठ कर मुझे दिलासा दोगे ना ? मेरे हमराज !! मेरी मासिक धर्म की समस्या पर मुझे आराम करने दोगे ना ? यदि मुझसे तरीके से खाना नही बना तो चुप चाप खा लोगे ना ? और सुनो !! मुझे मेरे अंतिम समय पर प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेर देना... ताकि सांस उखड़े तो तकलीफ न हो मुझे... बोलो !! करोगे ना ? बस इतना करना मै तुमसे पहले जाना चाहती हूँ मुझे विदा पूरा श्रृंगार करा के करना..... ताकि मुझे गर्व महसूस हो कि मैं तुम्हारी अर्द्धांगिनी थी.. मेरे मन के भाव में यही कामना रहती है कि तुम्हे कभी कोई कष्ट ना हो..... जब तक जिन्दा हूँ सदा तुम्हारी सेवा करूंगी.. और जब नही रहूंगी तो तुम्हे स्वयं का ख्याल रखने लायक बना जाऊंगी... मेरे मांग का सिंदूर का तुम तेज हो प्रियवर !! मैं अपनी रची हुई मेहंदी में भी तुम्हारा अक्स देखती हूँ... मेरी पायल मेरी बिंदिया मेरे कंगन सब तुम्हारे होने से है मुझे गौरवान्वित करते है ये सारे श्रृंगार....बस !! तुम मेरे सुख दुःख में खड़े रहना.. यदि कोई मुझे गलत कहे तो तुम सामने होकर उनका विरोध करना...मेरी ढाल बन कर मुझे आने वाले खतरों से बचाना.... मेरा स्वाभिमान हो तुम मेरे प्रियवर !! बस प्रेम से मुझे देख लेना ...और खाली समय में बैठकर मुझसे थोड़ा बात कर लेना..... मुझे सुकून मिलेगा.. मेरे साथ बैठ कर खाना खा लेना... जो तुमने फेरे में वचन लिए थे उसमे से जो भी तुमसे निभे निभा लेना... मै सदा तुम्हारी सहगामिनी बनी रहूंगी.... जब तक हूँ तुम्हारी राह देखूंगी और बनारस के घाट पर मणिकर्णिका घाट पर मुझे विदा कर देना... मैने तुम्हे भोलेनाथ से मांगा है बोलो प्रियवर !! दोगे ना मेरा साथ मेरे अंतिम सफर तक।
✍️ पूजा गुप्ता ( मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश )
