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शुक्रवार, मई 13, 2022

🌻हमसफर के नाम पत्र 🌻

सुनो ! मेरे हमसफर मेरे साथ सदा चलोगे ना ?... किसी राह पर यू अकेला तो नही करोगे ? मेरे परेशान होने पर मेरे पास बैठ कर मुझे दिलासा दोगे ना ? मेरे हमराज !! मेरी मासिक धर्म की समस्या पर मुझे आराम करने दोगे ना ? यदि मुझसे तरीके से खाना नही बना तो चुप चाप खा लोगे ना ? और सुनो !! मुझे मेरे अंतिम समय पर प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेर देना... ताकि सांस उखड़े तो तकलीफ न हो मुझे... बोलो !! करोगे ना ? बस इतना करना मै तुमसे पहले जाना चाहती हूँ मुझे विदा पूरा श्रृंगार करा के करना..... ताकि मुझे गर्व महसूस हो कि मैं तुम्हारी अर्द्धांगिनी थी.. मेरे मन के भाव में यही कामना रहती है कि तुम्हे कभी कोई कष्ट ना हो..... जब तक जिन्दा हूँ सदा तुम्हारी सेवा करूंगी.. और जब नही रहूंगी तो तुम्हे स्वयं का ख्याल रखने लायक बना जाऊंगी... मेरे मांग का सिंदूर का तुम तेज हो प्रियवर !! मैं अपनी रची हुई मेहंदी में भी तुम्हारा अक्स देखती हूँ... मेरी पायल मेरी बिंदिया मेरे कंगन सब तुम्हारे होने से है मुझे गौरवान्वित करते है ये सारे श्रृंगार....बस !! तुम मेरे सुख दुःख में खड़े रहना.. यदि कोई मुझे गलत कहे तो तुम सामने होकर उनका विरोध करना...मेरी ढाल बन कर मुझे आने वाले खतरों से बचाना.... मेरा स्वाभिमान हो तुम मेरे प्रियवर !! बस प्रेम से मुझे देख लेना ...और खाली समय में बैठकर मुझसे थोड़ा बात कर लेना..... मुझे सुकून मिलेगा.. मेरे साथ बैठ कर खाना खा लेना... जो तुमने फेरे में वचन लिए थे उसमे से जो भी तुमसे निभे निभा लेना... मै सदा तुम्हारी सहगामिनी बनी रहूंगी.... जब तक हूँ तुम्हारी राह देखूंगी और बनारस के घाट पर मणिकर्णिका घाट पर मुझे विदा कर देना... मैने तुम्हे भोलेनाथ से मांगा है बोलो प्रियवर !! दोगे ना मेरा साथ मेरे अंतिम सफर तक।

                    ✍️ पूजा गुप्ता ( मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश )



शुक्रवार, जनवरी 28, 2022

🏆 दिल और दिमाग की तकरार 🏆








प्रि..
"ये दिल तुम बिन कहीं लगता नही हम क्या करें।"

सुनो! याद है तुम्हे यह गाना! एक समय यह हम दोनों का मनपसंद गाना था। मेरा तो आज भी है। 
वो तुम ही तो हो जिसके लिए मेरे दिल और दिमाग में तकरार हुई।
         ...दिमाग की कठोर दलील की जमीं पर
           दिल के कोमल भाव की बरसात हुई...

तुम भी तो भीगे थे इस बरसात में।
तुम्हारा साथ पाकर सारे रिश्ते भुला दिए मैने। दिमाग ने कुछ समझाना भी चाहा, पर दिल ने इसे दरकिनार कर दिया।
प्यार की ताकत ही तो थी जिसके भरोसे दिल अकेला ही दिमाग़ जैसे महारथी से भिड़ गया।
हम दोनो ही खुश थे।
        ....दिल से दिल की बात हो रही थी,
         एक नए रिश्ते की शुरुआत हो रही थी...

तुम्हे पता है दिल का अपना ही दिमाग़ होता है, कोमल, मासूम और जज़्बातों से भरा।
कहां सोचता है कुछ नकारात्मक। फैसला भी लेता है भावों से भरा। जमाने के बनाए नियमों से दूर। जिनके दम पर सबसे लड़ने की ताकत रखता है।
मैंने भी लिया और तुमने भी लिया वो फैसला।

          ....मेरा तुमसे जो एक संबंध था, वो
         मेरे दिल का तुम्हारे दिल से अनुबंध था...

दो दिलों से लिया गया फैसला दिमाग पर भारी पड़ गया। दिल से दिल की बात हो रही थी।

पर इस कमबख़्त दिमाग को नही रास आया दिलों का मेल। यथार्थ के धरातल पर तो उसका ही राज है।
हम दोनों को अलग कर दिया। तुम आने का कहकर दूर चले गए।

हमारे दिलों का अनुबंध टूट सा गया। पर मै जानती हूँ, मैं अब भी तुम्हारे दिल के किसी कोने में बसी हूँ। बस तुम्हारा दिमाग शायद उससे तुम्हे मिलने नही देता।

दिमाग तो मेरा भी हावी होना चाहता है, पर मैं होने नही देती। दिल को अपने मैंने तुम्हारे अहसासों की नमी से हमेशा सिंचित किया है। 
तुम्हे दिल में हमेशा महफूज रखा। मुझे अब भी अच्छा लगता है तुमसे अकेले मे बातें करना। 

इतजार है अब भी तुम्हारा। जल्दी आना। और हाँ ! अपने दिल का ख्याल रखना। इसको कुछ हो गया तो अस्तित्व मेरा भी खत्म हो जाएगा।

तुम्हारी.....

                                          ✍️ प्रतिभा सिंह ( लखनऊ, उत्तर प्रदेश )

👨‍🏫 शिक्षक का मन 👨‍🏫

शिक्षक का मन भी कितना भोला, ज्ञान बाँटता, कभी न डोला। अपने सपनों को पीछे रखकर, बच्चों के सपनों को है तोला। खुद धूप सहकर छाँव है देता, हर बच्...