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गुरुवार, जून 29, 2023

⛲ मुझे आसमां मुख्तसर लग रहा है ⛲









मुझे आसमां मुख्तसर लग रहा है,

बहुत खूबसूरत सफर लग रहा है।


चुरा के सितारों से सौगात या रब,

दुपट्टे में इक-इक गुहर लग रहा है।


ये तय है के उसकी दुआ साथ है अब,

इबादत का कुछ-कुछ असर लग रहा है।


बड़ी मुश्किलों से मिला है वो मुझको,

कहीं खो ना जाए ये डर लग रहा है।


ये पायल की छन-छन वो चूड़ी की खन-खन,

इन्हीं से तो घर आज घर लग रहा है।


मेरी बूढ़े बरगद से यादें जुड़ी है,

तुम्हें तो फकत ये सज़र लग रहा है।


हवाओं की दस्तक से चौकी है ख़ुशबू,

यक़ीनन कोई मुंतज़र लग रहा है।।


✍️ ख़ुशबू ए फ़ातिमा ( भोपाल, मध्य प्रदेश )

शनिवार, जून 17, 2023

🌻 गरीबी 🌻









"वो आदाबे उल्फत दिखाने लगे हैं,

मोहब्बत के दीपक जलाने लगे हैं,,


जिसे दीद की इक नज़र मिल गई है,

उसे पा के नज़रें चुराने लगे हैं,,


गरीबी से जिसका नही कोई रिश्ता,

नसीहत की बातें सुनाने लगे हैं,,


वो अब दिल से दिल तक इजाजत के बिन ही,

ज़रा देखिए आने-जाने लगे हैं,,


किसे पाक करने की ख्वाहिश है पानी, 

ये फिर पाप करके जो आने लगे हैं,,


अता है अता ही अता है के ख़ुशबू,

गुलाबों के मौसम सताने लगे हैं ।।"


✍️ ख़ुशबू ए फ़ातिमा ( भोपाल, मध्य प्रदेश )

शनिवार, मार्च 18, 2023

🌻 औरतें 🌻










औरतें तो गुलाब होती हैं

चांदनी माहताब होती हैं।


घर बनाती भुला सभी मसले

उलझनें बेहिसाब होती हैं।


देखने में भले लगे नाजुक

कम नही वो जनाब होती हैं।


आप फुरसत मिले ज़रा पढ़िये

वो गज़ल की किताब होती हैं।


जान लेती है एक ही पल में

नीयते जब ख़राब होती हैं।


ख़ूबसूरत बला नही कहिए

वो बड़ी लाज़वाब होती हैं।


शख्सियत पर उठे सवालों के

औरतें ख़ुद ज़वाब होती है।


हर जवां दिल सज़ा रहा जिनको

जिंदगी भर का ख़्वाब होती हैं।


रोज़ सपने नयन सजाते हैं

रोज़ वो कामयाब होती हैं।


✍️ सीमा 'नयन' ( देवरिया, उत्तर प्रदेश )

गुरुवार, जनवरी 05, 2023

💞 दिल लगाती नही 💞



 








आजकल मैं उन्हें याद आती नही
जी रही पर मुझे सांस आती नही।

इन दिनों वह ख़फा रहते हैं हर घड़ी
क्या वजह है इसे जान पाती नही।

पूछता है अगर अपना रिश्ता कोई
देखकर आपका ऱुख़ बताती नहीं।

कुछ ख़ता आपकी भी रही हिज्र में
बात ये आपको मैं जताती नही।

जख्म इतना हमें आपने दे दिया
बात कोई हमें अब हंसाती नही।

इस कदर बेवफ़ा वो निकल जाएंगे
काश उनको कभी आजमाती नही।

इश्क़ इतना भी आसां नही है 'नयन'
जान जाती तो मैं दिल लगाती नही।

✍️ सीमा 'नयन' ( देवरिया, उत्तर प्रदेश )

शुक्रवार, नवंबर 04, 2022

💞 हसीन चाहत 💞








देख कितनी हसीन चाहत है,
खास उनके लिए मुहब्बत है।।

टूट कर चाहना तुम्हें हर पल,
इस तरह हो रही इबादत है।।

फिर न हो ये उदास आंखे अब,
हर खुशी बस तेरी अमानत है।।

ख़्वाब इक जिंदगी मुकम्मल का,
इश्क़ की कर रहा हिफाज़त है।।

तेरे लब पर हँसी रहे कायम,
मांगते बस खुशी की दौलत है।।

आप की चाहते सभी दिल की,
आरज़ू में मेरी सलामत है।।

तुम निगाहों में कैद रहती हो,
फिक्र करना हमारी आदत है।।

इस नज़र को पढ़ा है बस हमने,
मुझको खत की कहां ज़रूरत है।।

एक बेफिक्र ख़्वाहिश चाहत,
जिंदगी की अदीब चाहत है।।
 
✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )

बुधवार, सितंबर 14, 2022

🌸 दिल 🌸










कोई अरमान हर दिल में मचलता है।
लहू बनकर दिलों में प्यार बहता है।।

बहुत मासूम दिल ये मांस का टुकड़ा,
बहुत ताकत मगर दिल खास रखता है।।

दिलों की सरज़मीं पर ख़्वाब लेकर कुछ,
महल अहसास का बनता बिगड़ता है।।

धड़कती चीज़ हर इक दिल नही होती,
बनाने में दिलों को वक्त लगता है।।

खुशी पर खुश गमों से गमगीं होता है,
ये दिल बस एहसासों से बहकता है।।

सुना है कितना दिल में आग होती है,
तड़पता ख़्वाब कोई जो दहकता है।।

चुभन कुछ खट्टी मीठी बात की हो जब,
कहा फिर लोगों ने ये दिल सुलगता है।।

दिमागों की कहानी कुछ रही हो पर,
फसाना दिल अलग अंदाज़ कहता है।।

रहे "बेफिक्र" से जज़्बात इस दिल के,
तभी जिंदा है ये जब तक धड़कता है।।

✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )


रविवार, सितंबर 04, 2022

👩‍🏫 गुरु महिमा 👩‍🏫







छोड़ कर सदगुरु शरण तेरी मैं जाऊं किस तरह।
आपसे क्या क्या मिला ये भी बताऊं किस तरह।।

राह दिखलाई मुझे हर जिंदगी के मोड़ पर,
एहसानों को सभी अब भूल जाऊं किस तरह।।

जो बताया आपने वो ही लिखावट छप गई,
ज्ञान अंतर्मन छपा है जो वो मिटाऊं किस तरह।।

आज कितने काम आते हैं दिशा निर्देश सब,
आज कृतज्ञ हूं कितना ये दिखाऊं किस तरह।।

लोग कुछ अज्ञानता के इक भँवर में हैं फँसे,
आपकी शिक्षा सभी पर आज़माऊं किस तरह।।

ये सबक है आपका मत कर बहस अज्ञानी से,
ज्ञान सारा कीमती उन पर लुटाऊं किस तरह।।

हो गया "बेफिक्र" हूं विश्वास कर के आप पर,
प्रश्न इस विश्वास पर आखिर उठाऊं किस तरह।।

    ✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )

शनिवार, अगस्त 27, 2022

💞 मुहब्बत इबादत मुहब्बत खुदा है 💞



 





मेरी जिंदगी का यही फलसफा है।

मुहब्बत इबादत मुहब्बत खुदा है।। (१)

 

मुहब्बत बनी मंजिलें आज मेरी,

मुहब्बत यही बन गई रास्ता है।। (२)

 

सलामत रहे ख़्वाब मेरा हमेशा,

दुआओं का अब तो बचा आसरा है।। (३)

 

किसी दौर में भी न हारा कभी जो,

नही इश्क़ का हार से वास्ता है।। (४)

 

हुई याद आने की अब इंतिहां है,

सुलाकर मुझे ख़्वाब भी जागता है।। (५)

 

मेरी जान लेगी ज़रा बेरुखी भी,

मेरे दिल की हालत तुम्हें तो पता है।। (६)

 

वफ़ाओं के बाज़ार में अस्मतों सा,

यही इश्क हर बार तन्हा लुटा है।। (७)

 

हुआ इश्क़ में नाम बदनाम ऐसे,

लबों पर सभी के मेरा वाकिया है।। (८)

 

मिला है बहुत जिससे बेफिक्र धोखा,

उसी ने हमेशा भरोसा दिया है।। (९)

  

  ✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )


रविवार, जून 26, 2022

🏆 जुल्फें, लब, रूख़सार बहकें 🏆






ग़ज़लों से कितना प्यार बरसे
जहनों तन हो गुलज़ार महकें

जुल्फें, लब, रूख़सार बहकें
झुमके-बिंदी की मार सहते

दायरा दरम्यान आ जाए भले
मुख़्तसर हाथ में संसार भरके

आप रोशन सितारा जहाँ का
बेनूर नज़र कहाँ बेकार भटके

नील गगन सी चादर सिर पर
साया मुहाफ़िज़ प्यार बन के 

कौन कब तक बनेगा पासबाँ
निकल सिर जुनूँ सवार करके

मिसरे में रिश्ता आपसे जुड़ा
मुखड़ा आँखो में ख़ुमार लेके

✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

शनिवार, जून 25, 2022

🏆 चेहरे पर जो रौनक वो मुस्कान तो नही 🏆






चेहरे पर जो रौनक वो मुस्कान तो नही
चोट गहरी का ये कहीं निशान तो नही

उनसे करें बहाना हम नुकसान तो नही
समझदार है वो अक्ल से नादान तो नही

क्यूं झुके इतना कोई भगवान तो नही
दीन-धर्म उसका बचा ईमान तो नही

मेरे कौल, मेरे वादे, मेरे इरादे, गर है नेक
वक्त भले बदले, बदली जुबान तो नही

जो रखे ना रंजिशे किसी से कभी
इंसान ऐसा मिलना आसान तो नही

किसी को डराना आसान नही होता
इंसान है सब कोई भगवान तो नही

वादे सारे ही निभाते-निभाते इंसान
बदले वक्त मगर ज़ुबान तो नही

उम्र भर नसीबों को कोसते हो क्यूं
नसीब तेरे कर्मो का भुगतान तो नही

क्यों लरजते नही हाथ मार काट से भी
इंसान ही तो हैं हम सब शैतान तो नही

✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

शनिवार, जून 18, 2022

🏆 गरीबी 🏆






और कितनी करती नवाजिशें
कभी हुई ना जब कुछ इनायतें

यूं तो रखते बेशुमार शिकायतें
अपनी अमीरी की किफायतें

जोशे जवाँ गरीबी में भी जवाँ
मस्त माहौल ढलती रियायतें

तोड़कर किनारा मौज बहती
बीच धाराओं के रख हिदायतें

पस्त हौसलो को ले क्या करें
कमबखत पेट देता नसीहतें

तेरी हर ताकीद आयते जैसी
ना रस्म हुई कोई ना र'वायते

✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

शुक्रवार, जून 17, 2022

🏆 दिल के हौसले 🏆






ये कह के दिल ने मेरे हौसले बढ़ाए हैं
गमों की धूप के आगे खुशी के साए हैं

दिल है खास मगर नादानियाँ करता है
कदम-कदम पर कितनी ठोकरें खाए हैं

जिन्हें चाहे उन्हें पाएं ऐसा नामुमकिन
छोड़ यादों के भंवर सब गम भुलाए हैं

ऐसा करके किसी और को क्या फर्क
अपने आप को मगर बहुत सताए है

दिल नफरत करनी नही सीख पाया
जमाने की लपट से इसे कैसे बचाए है


✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

शनिवार, जून 11, 2022

🏆 बारिश 🏆









अंतर्मन बारिश होती रहती है
यादें दामन भिगोती रहती है

कभी बेपनाह तो कभी गुम-सुम
बारिश में दुआ कबूल रहती है

कभी बदली तो कभी आँखें
लगातार ही बरसती रहती है

फिसल ना जाऊं बारिश का समां
अपनी याद रोकूं जो आती रहती है

बरसात के दिन या गुरबत के दिन
गाँव हो या शहर बारिश होती रहती है

✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

सोमवार, अप्रैल 25, 2022

👨‍👩‍👧‍👧 रिश्ते होते हैं फरिश्ते 👨‍👩‍👧‍👧






कुछ रिश्ते जीवन में फरिश्ते की तरह होते है
ऐसे रिश्तो को ही लोग मरने के बाद रोते हैं

कोई होता है जो आकर बन जाता है सहारा
जब बेजार बेकार हो हमारे भाग्य सोते है

फरिश्ते से रिश्तों के सहयोग के जिंदा हैं यहाँ
बीज तो काटने पड़ेंगे वही जो हम बोते है

ज़रा सी जिम्मेदारी आने के ड़र से दूरी बढ़ा लेते
हम सबसे पहले अपने खून के रिश्ते खोते है

जीवन भर औरों की बात मान अपनों से रूठे
कोई पूछे कि, बहकाने वाले के भी अपने होते है 


✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

शुक्रवार, अप्रैल 01, 2022

💞 दिल महफ़िल आबाद है और क्या लिखूँ 💞



 




तन्हा, हालात का मारा है हर कोई यहाँ
दिल की महफ़िल में रोशनी क्या लिखूँ

दौड़ता है आदमी राहत के लिए यहाँ
पैर के छालों पर दुखती टीस क्या लिखूँ

तू आईना है मेरा और मेरे जज्बात का
तू ही बता अपनी ही तारीफ क्या लिखूँ

भूखे बेहाल है बच्चें फुटपाथ पर यहाँ
दिल को बहलाने को आज क्या लिखूँ

दिल ब़ज्म में आबाध आना-जाना तेरा
मेरे ईश्क की इंतहा और क्या लिखूँ

पल-पल की यादें सौगातें है तेरी यहाँ
दिल महफ़िल आबाद है और क्या लिखूँ

      ✍️ रश्मि पोखरियाल 'मृदुलिका' ( देहरादून, उत्तराखंड )

गुरुवार, मार्च 31, 2022

💞 दिल ने मेरे हौसले बढ़ाए हैं 💞







ये कह के दिल ने मेरे हौसले बढ़ाए हैं,
गमों की धूप के आगे खुशी के साए हैं।

दिल है खास मगर नादानियाँ करता है,
कदम-कदम पर कितनी ठोकरें खाए हैं।

जिन्हें चाहे उन्हें पाएं ऐसा नामुमकिन,
छोड़ यादों के भंवर सब गम भुलाएं हैं।

ऐसा करके किसी और को क्या फर्क,
अपने आप को मगर बहुत सताएं है।

दिल नफ़रत करनी नही सीख पाया,
जमाने की लपट से इसे कैसे बचाएं है।

      ✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

💞 ज़िंदगी दुश्वार करके चल दिए 💞











खुद ही अपने दिल पर, वो वार करके चल दिए,
एहसासों को अंदर ही वो मार करके चल दिए।

इश्क़ करके हारे दिल, फिर हार गए वो दोस्ती,
दिल-ए-खास रिश्ते को बेज़ार करके चल दिए।

आया नही समझ हमें ये अजब जमाना इश्क़ का,
पास भी आए नहीं दूर से ही प्यार करके चल दिए।

एक पल भी कभी ना खफ़ा हुए, हाँ में हाँ करते रहे,
आज अंत समय में वो इनकार करके चल दिए।

क्या हुआ हासिल उसे बेवजह की तकरार कर,
जीती हुई बाज़ी को वो हार करके चल दिए।

घुट रहे अब अंदर सांझ, खुद ही खुदके दुश्मन बने,
हँसती-खेलती ज़िंदगी को दुश्वार करके चल दिए।

      ✍️ सुशील यादव 'सांझ' ( महेंद्रगढ़, हरियाणा )

रविवार, मार्च 06, 2022

🌻तेरे बिन...🌻









तेरे बिन हमसफ़र किधर जाए 
तुझमे खोकर तो हम निखर जाए

जिंदगी प्यार में गुजर जाए 
लम्हा-लम्हा यूँ ही ठहर जाए

नज़रो से नज़रो में समाए हो 
नैन मिलते ही हम तो मर जाए

राह कितनी भी चाहे मुश्किल हो 
संग-संग मंजिलो को तर जाए

झोंका चाहत का है फिजाओं में 
खुशबू ढूंढे बिना भला किधर जाए

देख ले तू जो मुझको जानेजां 
तेरी आँखों मे ही हम तो सँवर जाए

जाम नज़रो से ही पिला साकी 
नींद पलको पे ही आ के ठहर जाए

       ✍️ क्षमा श्रीवास्तवा ( देवरिया, उत्तर प्रदेश )


💠 हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी 💠

    चाहे हों हम हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई। भारत माता की संतानें, हम सब हैं भाई-भाई।  एक हमारी रगों में बहता खून, और एक हैं हमारे रंग रूप। ...