Puneet Anupam Group
रचनाकारों, कलाकारों, प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली शख्सियतों को प्रोत्साहित करने का विशेष मंच।
बुधवार, अक्टूबर 07, 2026
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन ‘मन सृजन साहित्यिक महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार "पुनीत साहित्य भूषण" सम्मान से सम्मानित।
सोमवार, अक्टूबर 05, 2026
🍁 आओ ! बदलें अपनी आदतें 🍁
जो साफ करते हैं दूसरों का कूड़ा,
उनके घरों में अक्सर अंधेरा होता है।
हम तो मना लेते हैं त्योहार रोशनी में,
पर उनकी सुबह का रुख कुछ और होता है।
वो गटर, वो नालियां, वो गंदगी के ढेर,
जिन्हें देखकर हम अपनी आँखें फेर लेते हैं।
सोचो ज़रा, उनके स्वास्थ्य का क्या ?
जो हर रोज़ अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
कूड़ेदान का सही इस्तेमाल तो बस एक बात है,
पर असली स्वच्छता वो है जो हर इंसान को सम्मान दे।
जब तक न बदलेगी हमारी यह संकुचित सोच,
तब तक देश कैसे खुद को पूरी तरह महान कहे ?
प्लास्टिक का यह पहाड़, यह ज़हरीला धुआँ,
यह सिर्फ ज़मीन नही, हमारा भविष्य निगल रहा है।
आओ जागें और बदलें अपनी आदतें आज ही,
क्योंकि हमारा ही कल, कचरे के इस ढेर में जल रहा है।
✍️ श्रीजी जैन ( शाहदरा, दिल्ली )
👸 स्त्री का सौंदर्य 👸
स्त्री का सौंदर्य उसकी देह नही है,
एक बहुत सुंदर शजर है,
जिसमें सुन्दरता के सारे आयाम हैं।
यदि आपका नज़रिया समझता है समर्पण,
यदि साँसें समझती हैं सुकूं,
तो स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
पैरों में पड़ी रिश्ते की अदृश्य बेड़ियां,
ज्यों ही तुम्हें अनुभव होता है कभी दर्द का,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
बाप के घर का हिस्सा उसके लिए किस्सा,
फिर भी उसकी नवाजिश यदि तू देख पाएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
तेरे बीमार होते ही उसका हाथ माँ जैसा बन जाएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
वह स्त्री ही है जो थोड़ा-सा सम्मान मिलने भर से,
हर रिश्ता बरकरार रखती है,
सिर्फ़ एक दिन निभाओगे उसका किरदार जो तुम,
तो तुम्हें स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
जिसके आने से घर में दया करुणा और प्रेम आएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
मजबूत विचारों वाली महिला,
पुरुष प्रधानता से कभी नही हारती,
जिस दिन तू यह बात समझ जाएगा,
उस दिन तुझे स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा।
✍️ डॉ० सोहन पाल 'मज़ार' (मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश)
✨ इंसानियत✨
इंसानियत का भाव मन में जिसके
वही सच्चा इंसान कहलाता है
निस्वार्थ सेवा यदि वह करता
तो नेक इंसान बन जाता है
आज हैवानियत को अपनाकर इंसान
समाज में अपना मुंह छुपाता है
संस्कारों की कमी सर्वत्र दिखाकर
माता-पिता के अपमान की वजह बन जाता है
वृक्षों से हम सीखें कि
पत्थर खाकर कैसे किया जाता उपकार
खट्टे-मीठे फल हैं देते वे
जिससे मिलती खुशी अपरंपार
जब इंसान ही इंसान के काम ना आता
तो पशु समान जीवन उसका बन जाता
जो इधर-उधर भटकता रहता
समाज में सम्मान कभी ना पाता
कौन किस धर्म जाति का है बस
यही मन में है प्रश्न महान
असली इंसान होता है वही
चेहरे से जो भाव जो जाता जान
धर्म की शिक्षा भूल गए सब
इंसानियत का बचा नही निशान
इंसानियत आज मुंह छिपाकर रो रही
कहां विलुप्त हो गए अच्छे इंसान
हैवानियत कर रही नृत्य चारों ओर
और इंसानियत रो रही है जोर-जोर
रिश्तों में ममता और भावनाएं हो गई हैं मौन
धन वैभव की लालसा में आप कौन और हम कौन
आओ ! समय रहते हम जाग जाएं
इंसानियत को डूबने से बचाएं
बच्चों को नेक इंसान बनाएं
उनका और अपना भविष्य सुरक्षित बनाएं।
✍️ वसुधा श्रीवास्तव ( भोपाल, मध्य प्रदेश )
रविवार, अक्टूबर 04, 2026
💞 जब तुम मुझे मिले 💞
जब तुम मुझे मिले तो
ख्वाबों ने जैसे सच होना सीख लिया
मेरी खामोश दुआओ ने
तुम्हारा नाम लेना सीख लिया
जो मांगा था कान्हा से कभी
तुमने वो बनकर मुझे अपना लिया….
जब तुम मुझे मिले तो
मेरे सारे ग़मो को
एक पल में दूर कर गए
मेरी सारी परेशानियों को
अपनी मुस्कान में समेट गए
मेरी सारी प्रार्थनाओं को
तुमने वरदान सा बना दिया….
जब तुम मुझे मिले तो
एक-एक कर सब ख्वाब पूरे होने लगे
मेरी अधूरी सी जिंदगी में मानो
सारे रंग पूरे होने लगे….
जब तुम मुझे मिले तो
मैं प्रेम को परमेश्वर बना पूजने लगी
तुम्हारे साथ बिताया हर पल
मैं कविता बना लिखने लगी….
जब तुम मुझे मिले तो
सारी कहानियां, कविताएं सार्थक होने लगी
मेरी जिन्दगी की हर खामोश दुआ
तुमसे मिलकर मुक्कमल होने लगी
जब तुम मुझे मिले तो
मैं तुम में ही घुलने लगी….
✍️ प्रियंका पुष्करणा ( चित्तौड़गढ़, राजस्थान )
✨ चंचल मन ✨
अठखेलियों, दुविधाओं में घिरा मेरा चंचल मन,
सारे संसार की खुशियां पाना चाहता है।
कभी सोच के सागर की गहराई में उतरना चाहता है,
कभी अरमानों के पंख लगाकर आसमान में उड़ना चाहता है,
कभी चाकू की धार से तेज होना चाहता है मेरा चंचल मन।
कभी कठिनाइयों से टकराना चाहता है,
कभी तितली बन बगीचे में जाना चाहता है,
कभी खुशबु बन सबको महकाना चाहता है,
कभी फसल बन खेतों में लहराना चाहता है,
पल-पल मचलता रहता है मेरा चंचल मन।
कभी पुराने विचारों को सजाना चाहता है,
कभी नए विचारों को अपनाना चाहता है,
कभी एकता के गीत गुनगुनाना चाहता है,
रहता भविष्य के सुनहरे सपने बुनता सदा ही,
थोड़ा भी धीरज नही रखता है मेरा चंचल मन।
पर अब चंचल मन को नियंत्रित करके घर से निकलना है,
संभल-संभलकर नेकी, ईमानदारी की राह पर चलना है,
मनाती बहुत हूँ अक्सर पर वो मानता नही नादान,
सांसारिक उलझनों में उलझ जाता है मेरा चंचल मन।
✍️ रत्ना वाधवानी ( भोपाल, मध्य प्रदेश )
❤️ इश्क नही आसान ❤️
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से,
तुम लाख सम्भालो दिल को,
चूके ना मनमानी से,
नदिया बहती है कल-कल,
निर्मल शीतल उसका जल,
जा मिलती बहती अविरल,
सागर के खारे पानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
कश्ती को पता है नदिया की,
लहरें हैं कितनी ज़ालिम,
इश्क करे फिर भी वह,
लहरों की आनी जानी से,
किसने दिखलाया नदिया को,
सागर का चौड़ा सीना,
यह इश्क नही तो क्या है,
जा मिलती सागर तूफानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
अपना वजूद वो खोकर,
खुद भी खारा बन जाती है,
सागर के इश्क में डूबी,
जा मिलती खारे पानी से,
श्वेत धवल वस्त्रों की रानी,
गर्वित है रत्नेश दीवानी,
खिल उठते होंठ नदी के,
मिल सागर के पेशानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन ‘मन सृजन साहित्यिक महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार "पुनीत साहित्य भूषण" सम्मान से सम्मानित।
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा मन की भावनाओं को रचनाओं के माध्यम से प्रकट करने का अवसर देने के उद्देश्य से रचनाकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऑनल...
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बन जाते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी जो बांध देते हैं, हमें किसी से भी कुछ रिश्ते ईश्वर की देन होते हैं कुछ रिश्ते हम स्वयं बनाते हैं। बन जाते हैं ...
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पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...





