Puneet Anupam Group
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शनिवार, अक्टूबर 17, 2026
📜 कागज़-कलम वार्ता 🖋️
🌼 अक्षर-अक्षर दीप जलाए 🌼
तिमिर-चीर जो राह दिखाए,
अक्षर-अक्षर दीप जलाए।
तम के घनघोर प्रपात बीच,
नव-चेतना का मन्त्र सुनाए॥
अज्ञानता की इस रजनी में,
ज्ञान-मूर्च्छित थी हर वाणी।
चरणों में बैठ समर्पण के,
सीखी हमने पावन बानी॥
स्नेह-सलिल सा वह बहता है,
पथिक को जो मंजिल बतलाए।
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
घट-घट के भीतर अविद्या का,
जो आवरण घना छाया था।
करुणा-कर से प्रज्ञा का उसने,
अमित उजास दिखाया था॥
वह कुम्हार सा गढ़ता मिट्टी,
जीवन को अनुपम रूप बनाए।
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
वह पारस है, जो लोहे को,
कंचन सा पावन करता है।
हर शिष्य के उर के तम को,
वह सहज भाव से हरता है॥
नित प्रेरणा की पावन धारा,
मन-मन्दिर में जो महकाए।
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
ब्रज की पावन रज से सजकर,
झारखण्ड की इस वसुधा पर।
संस्कृत की अलख जगाई है,
ज्ञान-दीप जलाया घर-घर॥
ऋषि-मुनियों की इस विरासत को,
हर मानस तक पहुँचाई है।
देववाणी की इस पावन धारा से,
नया भविष्य सँवर जाए।
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
तपस्या की उस मूरत से,
हमने जीने का ढंग सीखा।
कठिन राहों के हर संकट को,
हँसकर आगे बढ़ना सीखा॥
वह साधना का सम्बल बनकर,
जीवन को सार्थक कर जाए।
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
नित साधना और निष्ठा की,
ऐसी वह अमर कहानी है।
गुरु चरणों की धूलि जग में,
गंगा-जल सी कल्याणी है॥
कहते 'भूपेन्द्र' यही जीवन का,
ऋण कोई कैसे चुका पाए ?
अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥
✍️ डॉ० भूपेन्द्र कुमार गौतम
( रामगढ़, झारखण्ड )
💠 सच्ची दोस्ती 💠
💐 कैसे बांधू एक रिश्ते में 💐
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
मन का जिससे भाव जुड़ा,
वो इतना प्यार नाता है।
ऐसा अनोखा रिश्ता प्यारा,
हर रिश्ते का प्रेम समाया है।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
कभी डांटे मात-पिता सा,
कभी भाई-बहन सा झगड़ा होता है।
कोई ना ले सकता है जगह को उनकी,
इनके आलिंगन से गम सारा मिटता है।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
तेरे-मेरे रिश्ते के खातिर कई बार तो,
प्रियतमा का फोन भी काटा है।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
कभी भड़कते बॉस के जैसे,
कभी सहकर्मी की बातों का बटर मसाला है।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
बीमारी का गर पता लगे,
तो डॉक्टर नर्स भी बन जाते हैं।
ज्ञान वाचने का मन हो इनका,
ब्रह्म गुरु हो जाते हैं।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
कई रिश्तों का अपनापन,
जिस एक रिश्ते ने अपनाया है।
यह है वही प्यारा सा बंधन,
जो दोस्ती कहलाया है।
कैसे बांधू एक रिश्ते में,
दस मनको की माला है।
✍️ अभिषेक सिंह कुशवाहा "अनभिज्ञ"
( पीलीभीत, उत्तर प्रदेश )
🙍♀️ क्यों किसी को… 🙍♀️
क्यों किसी को प्यार के बदले,
प्यार नही मिलता है।
कोमल हृदय, भावनाओं से भरे हो,
फिर भी चाहत का उपहार नही मिलता है।
झुलसते-तड़पते दिल पर कभी भी,
पड़ी नही प्रीत की बारिशें।
घुट-घुट कर रह गये अरमान,
और अधूरी रह गई ख्वाहिशें।
चाहा जिसे दिलो-जान से वो,
जाने क्यों बिछड़ जाता है।
रह जाता मन का आंगन खाली,
और पंछी उड़ जाता है।
कैसे ये प्यार के रस्मों-रिवाज हैं,
पागल मन में समाए ना।
कितनी बेरहम पाबंदियां हैं,
दिल इससे निकल पाए ना।
क्यों किसी को कभी जीवन में,
प्यार मुकम्मल नही मिलता।
मिलते हैं हजारों आंसू मगर,
एक मिलन का पल नही मिलता।
रीत है कैसी यह,
क्यों दूरी बन जाती है ?
दिलवालों की किस्मत,
क्यों सदा अधूरी रह जाती है ?
✍️ डोली पाठक ( पटना, बिहार )
✨ डर ✨
जन्म से मृत्यु तक
डर रहता है हावी
हर कदम पर मन कहता
संभलकर चलना
कहीं कोई ठोकर न लगे
कहीं कोई दुख न मिले
कोई तकलीफ़ न आए
यही आशंका मन में रहती है
बीमार पड़ते ही
डॉक्टर, हकीम, दवाओं की
कतार लग जाती है
जिंदगी को बचाए रखने की
हर कोशिश की जाती है
माता-पिता के दिल में भी
एक डर पलता रहता है
कहीं कुछ हो न जाए
मेरे लाल को
कहीं कोई आँच न आए
मेरे लाल को
माना कि मृत्यु
एक दिन आनी है
फिर क्यों डर के साए में
जिंदगी बितानी है
कभी-कभी जिंदगी में
ऐसे मोड़ भी आते हैं
जब उजाले में भी
डर के बादल छा जाते हैं
जब किसी अपने से
धोखा मिलता है
तो हर हमदर्दी जताने वाले से भी
दिल घबराने लगता है
फिर मन से पूछती हूँ
आखिर डर किस बात का
जिस बात से डरती हूँ
क्या वह सचमुच बाहर है
या कहीं मेरे ही भीतर
उसका बसेरा है
हिम्मत करके
एक बार बाहर निकलो
तो डर का अस्तित्व
कहीं दिखाई नहीं देता
जो मन की कैद से निकले
उसके सामने भय
टिक नही पाता
जो जमीन से जुड़े रहकर
आसमान छूने के ख्वाब देखते हैं
वे केवल ख्वाबों में नही
हकीकत की राह पर चलते हैं
वे शेरदिल इंसान हैं
डरकर पीछे नहीं हटते
मुसीबतों से घबराते नही
डटकर उनका सामना करते हैं
क्योंकि डर के उस पार ही
हिम्मत का संसार है
और जिसने डर को जीत लिया
वही जिंदगी का असली हकदार है
✍️ पूनम लता ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )
गुरुवार, अक्टूबर 15, 2026
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन ‘सिनेमा साहित्यिक महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।
📜 कागज़-कलम वार्ता 🖋️
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पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...





