Puneet Anupam Group
रचनाकारों, कलाकारों, प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली शख्सियतों को प्रोत्साहित करने का विशेष मंच।
रविवार, अगस्त 30, 2026
💠 तीज आधारित लघुकथाएं 💠
शनिवार, अगस्त 29, 2026
🧩 गृहिणी की भावनाएँ 🧩
सतत सुनाते रहते मुझको, तुम ऐसा पैगाम है।
तथापि इस गृह की खातिर और हर सदस्य के निमित्त,
प्राण दांव पर रख करती हूँ, कर्तव्यों को अमित ॥१॥
मुझे नहीं चाहिए कोई, मास का पारिश्रमिक-वेतन,
मैं न मांगती बहुमूल्य साड़ी, और न कोई रत्नहार,
✍️ पुजा हरिश्चंद्र धनू ( पालघर, महाराष्ट्र )
शुक्रवार, अगस्त 28, 2026
🪅 ख़्वाहिशें 🪅
🦚 तुम्हारे बिना 🦚
दर्द की चादर,
सुबह रो-रो के आसमां ने,
आंखें लाल कर ली थी,
समंदर भी रात भर रोया था,
सुबह जो उसकी रेत गीली थी,
सच है रात ने भी आंसू बहाए थे,
सुबह फूलों पर ओस की बूंदे पड़ी थी,
चांद तारे भी रोए थे,
धरती जो गीली थी,
सुबह पेड़ों के झुरमुट से सूरज ने झांक कर देखा,
पूछा क्या बात है खामोश क्यों हो ?
क्यों सूनी है आंखे मायूस क्यों हो ?
मैंने कहा पूछो इन पेड़ों से जो रात भर आंसू बहाते रहे,
पूछो इन पहाड़ों से जो रात भर मेरे आंसू पोछते रहे,
इन नजारों से भी पूछ लेना जो मुझसे नजरें न मिला पाए,
इन बहारों से भी पूछ लेना क्यूं ये इतना मुझको रुलाए,
दिनकर बोला नजर को बदलो फिर नजारे भी बदल जाएंगे,
सोच को बदलो समंदर जमीन,
चांद तारे खूबसूरत नजर आएंगे,
तुमने दर्द की चादर लपेट रखी है,
जरा उसे उतारकर तुम फेको,
मुझे रोज डूबना पड़ता है-क्या मैं रोता हूँ मुझे देखो,
मैंने गौर से देखा सूरज भू पर सिंदूरी रंग बिखेर रहा था,
लाल रंग और कूची से मानो,
चित्र उकेर रहा था,
मैं क्षणभर सब कुछ भूल कर,
उन सिंदूरी चित्रों को निहारने लगी,
सचमुच ही धरती अब मुझे सुंदर नजर आने लगी,
मुझे सुंदर नजर आने लगी।
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )
रविवार, मार्च 24, 2024
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।
शनिवार, मार्च 02, 2024
🍥 कुछ रिश्ते ऐसे भी…. 🍥
बन जाते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी
जो बांध देते हैं, हमें किसी से भी
कुछ रिश्ते ईश्वर की देन होते हैं
कुछ रिश्ते हम स्वयं बनाते हैं।
बन जाते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी
जो अपनों से बढ़कर अपने होते हैं
स्नेह और विश्वास से जो बने
वह रिश्ते जीवन पर्यंत साथ निभाते हैं।
आ जाती है समझ जब अहमियत रिश्तो की
वह रिश्ते कई मक़ाम पार कर जाते हैं
होते हैं कुछ रिश्ते विश्वास के ऐसे भी
जो हमारे जीवन में सबसे खास बन जाते हैं।।
✍️ रुचि पारीक ( अजमेर, राजस्थान )
बुधवार, फ़रवरी 28, 2024
👨👩👧👧 रिश्ते 👨👩👧👧
जीवन में जरूरी हैं रिश्तों की छांव,
बिन रिश्ते जीवन बन जाए एक घाव।
रिश्ते होते हैं प्यार और अपनेपन के भूखे,
बिना ममता और स्नेह के रिश्ते लगे रूखे।
हर रिश्ते का हैं अपना एक महत्व,
बेनाम रिश्तों का ना हैं कोई अस्तित्व।
जीवन रूपी पेड़ की रिश्ते हैं अलग-अलग टहनी,
होती हैं इन टहनियों में कभी-कभी कहासुनी।
रिश्तों के बीच चलता हैं कभी-कभी मनमुटाव,
फिर भी होता हैं रिश्तों में अपनो के प्रति झुकाव।
✍️ करिश्मा नरेंद्र मल ( गढ़चिरौली, महाराष्ट्र )
💠 तीज आधारित लघुकथाएं 💠
1. ( माँ की हरी साड़ी ) शादी के बाद पहली तीज पर बेटी मायके नही जा पाती। माँ अपनी पुरानी हरी साड़ी काटकर उसके लिए एक छोटा-सा पोटली बैग सिलकर...
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जीवन में जरूरी हैं रिश्तों की छांव, बिन रिश्ते जीवन बन जाए एक घाव। रिश्ते होते हैं प्यार और अपनेपन के भूखे, बिना ममता और स्नेह के रिश्ते...
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पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...





