शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

📜 कागज़-कलम वार्ता 🖋️












कागज़ ने कलम से कहा, “तुम मन की आवाज़,
मैं मौन साधना में लिपटा, तुम शब्दों का साज़।

तुम बूँद विचारों की हो, मैं धरती का वक्ष,
मिलकर हम रचते यहाँ, नवयुग का प्रत्यक्ष।

तुम लिखती हो क्रांति तो, मैं सहता हूँ घाव,
तुम लिखती हो प्रेम तो, महक उठे हर गाँव।

तुम बन जाती न्याय जब, मैं बनता अभिलेख,
झूठ खड़ा थरथर करे, पढ़कर सत्य-विवेक।

पर सुनना मेरी कलम, मत बिकना दरबार,
सत्ता के सम्मोहन में मत करना व्यापार।

स्याही केवल रंग नही, अंतरात्मा का नीर,
शब्द वही जो बाँट दें, पीड़ित जन को धीर।

 ✍️ अनीता मिश्रा सिद्धि ( पटना, बिहार )

🌼 अक्षर-अक्षर दीप जलाए 🌼









तिमिर-चीर जो राह दिखाए,

अक्षर-अक्षर दीप जलाए।

तम के घनघोर प्रपात बीच,

नव-चेतना का मन्त्र सुनाए॥


अज्ञानता की इस रजनी में,

ज्ञान-मूर्च्छित थी हर वाणी।

चरणों में बैठ समर्पण के,

सीखी हमने पावन बानी॥

स्नेह-सलिल सा वह बहता है,

पथिक को जो मंजिल बतलाए।

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥


घट-घट के भीतर अविद्या का,

जो आवरण घना छाया था।

करुणा-कर से प्रज्ञा का उसने,

अमित उजास दिखाया था॥

वह कुम्हार सा गढ़ता मिट्टी,

जीवन को अनुपम रूप बनाए।

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥


वह पारस है, जो लोहे को,

कंचन सा पावन करता है।

हर शिष्य के उर के तम को,

वह सहज भाव से हरता है॥

नित प्रेरणा की पावन धारा,

मन-मन्दिर में जो महकाए।

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥


ब्रज की पावन रज से सजकर,

झारखण्ड की इस वसुधा पर।

संस्कृत की अलख जगाई है,

ज्ञान-दीप जलाया घर-घर॥

ऋषि-मुनियों की इस विरासत को,

हर मानस तक पहुँचाई है।

देववाणी की इस पावन धारा से,

नया भविष्य सँवर जाए।

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥


तपस्या की उस मूरत से,

हमने जीने का ढंग सीखा।

कठिन राहों के हर संकट को,

हँसकर आगे बढ़ना सीखा॥

वह साधना का सम्बल बनकर,

जीवन को सार्थक कर जाए।

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥


नित साधना और निष्ठा की,

ऐसी वह अमर कहानी है।

गुरु चरणों की धूलि जग में,

गंगा-जल सी कल्याणी है॥

कहते 'भूपेन्द्र' यही जीवन का,

ऋण कोई कैसे चुका पाए ?

अक्षर-अक्षर दीप जलाए॥ 


✍️ डॉ० भूपेन्द्र कुमार गौतम

      ( रामगढ़, झारखण्ड )

💠 सच्ची दोस्ती 💠

दोस्ती मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में  से एक है जो विश्वास और आपसी समझ पर आधारित है दोस्ती का रिश्ता हम खुद चुनते हैं। सच्ची दोस्ती हमें जीवन के कठिन रास्तों को पार करवाने में सक्षम बनाती है। सच्चा दोस्त हमारे मुश्किल समय में हमारा सहारा बनता है।

सच्ची दोस्ती में स्वार्थ नही होता। सच्चा दोस्त हमे गलत रास्ते पर चलने से रोकता है। उसके साथ हम अपने मन की उलझन साझा कर सकते हैं। वह हमारे जीवन में रंग भर देता है सच्चा दोस्त हमारी अनमोल पूंजी है। हमें हमेशा आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहता है। हमारे जीवन के सफर को आसान बना देता है। सच्ची दोस्ती सकारात्मक ऊर्जा देती है। भावनात्मक सुरक्षा देती है। दोस्ती एक विश्वसनीय पौधे की तरह है जिसे ईमानदारी और आदर से सींचना पड़ता है। सच्ची दोस्ती का रिश्ता जीवन पर्यंत रहता है। इस रिश्ते की कदर करनी चाहिए। सच्चे दोस्त हमारे व्यक्तित्व को निखारने में लगे रहते हैं।

जीवन की हर परिस्तिथियों में हमारे साथ रहते हैं। इस रिश्ते में संतुलन बनाए रखना चाहिए। सच्ची दोस्ती को आपसी समझ संतोष और विश्वास की आवश्यकता होती है। यह रिश्ता किसी भी बंधन से पूरी तरह से मुक्त होता है। सच्चा दोस्त मजबूत सहारा होता है। सच्ची दोस्ती समय के साथ और अधिक घनिष्ठ होती जाती है। सच्ची दोस्ती एक अनमोल उपहार है। इसे सहेज कर रखना चाहिए।

✍️ रत्ना वाधवानी ( भोपाल, मध्य प्रदेश )

💐 कैसे बांधू एक रिश्ते में 💐








कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।

मन का जिससे भाव जुड़ा,

वो इतना प्यार नाता है।


ऐसा अनोखा रिश्ता प्यारा,

हर रिश्ते का प्रेम समाया है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कभी डांटे मात-पिता सा,

कभी भाई-बहन सा झगड़ा होता है।

कोई ना ले सकता है जगह को उनकी,

इनके आलिंगन से गम सारा मिटता है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


तेरे-मेरे रिश्ते के खातिर कई बार तो,

प्रियतमा का फोन भी काटा है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कभी भड़कते बॉस के जैसे,

कभी सहकर्मी की बातों का बटर मसाला है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


बीमारी का गर पता लगे,

तो डॉक्टर नर्स भी बन जाते हैं।

ज्ञान वाचने का मन हो इनका,

ब्रह्म गुरु हो जाते हैं।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कई रिश्तों का अपनापन, 

जिस एक रिश्ते ने अपनाया है।

यह है वही प्यारा सा बंधन,

जो दोस्ती कहलाया है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


✍️ अभिषेक सिंह कुशवाहा "अनभिज्ञ" 

           ( पीलीभीत, उत्तर प्रदेश )

🙍‍♀️ क्यों किसी को… 🙍‍♀️








क्यों किसी को प्यार के बदले, 

प्यार नही मिलता है।

कोमल हृदय, भावनाओं से भरे हो, 

फिर भी चाहत का उपहार नही मिलता है।


झुलसते-तड़पते दिल पर कभी भी,

पड़ी नही प्रीत की बारिशें।

घुट-घुट कर रह गये अरमान, 

और अधूरी रह गई ख्वाहिशें।


चाहा जिसे दिलो-जान से वो, 

जाने क्यों बिछड़ जाता है।

रह जाता मन का आंगन खाली, 

और पंछी उड़ जाता है।


कैसे ये प्यार के रस्मों-रिवाज हैं,

पागल मन में समाए ना।

कितनी बेरहम पाबंदियां हैं, 

दिल इससे निकल पाए ना।


क्यों किसी को कभी जीवन में,

प्यार मुकम्मल नही मिलता।

मिलते हैं हजारों आंसू मगर,

एक मिलन का पल नही मिलता।


रीत है कैसी यह, 

क्यों दूरी बन जाती है ?

दिलवालों की किस्मत,

क्यों सदा अधूरी रह जाती है ?


✍️ डोली पाठक ( पटना, बिहार )

✨ डर ✨








जन्म से मृत्यु तक

डर रहता है हावी

हर कदम पर मन कहता

संभलकर चलना

कहीं कोई ठोकर न लगे

कहीं कोई दुख न मिले

कोई तकलीफ़ न आए

यही आशंका मन में रहती है


बीमार पड़ते ही

डॉक्टर, हकीम, दवाओं की

कतार लग जाती है

जिंदगी को बचाए रखने की

हर कोशिश की जाती है

माता-पिता के दिल में भी

एक डर पलता रहता है 

कहीं कुछ हो न जाए

मेरे लाल को

कहीं कोई आँच न आए

मेरे लाल को


माना कि मृत्यु

एक दिन आनी है

फिर क्यों डर के साए में

जिंदगी बितानी है 

कभी-कभी जिंदगी में

ऐसे मोड़ भी आते हैं

जब उजाले में भी

डर के बादल छा जाते हैं


जब किसी अपने से

धोखा मिलता है

तो हर हमदर्दी जताने वाले से भी

दिल घबराने लगता है

फिर मन से पूछती हूँ 

आखिर डर किस बात का 

जिस बात से डरती हूँ

क्या वह सचमुच बाहर है 

या कहीं मेरे ही भीतर

उसका बसेरा है 


हिम्मत करके

एक बार बाहर निकलो

तो डर का अस्तित्व

कहीं दिखाई नहीं देता

जो मन की कैद से निकले

उसके सामने भय

टिक नही पाता

जो जमीन से जुड़े रहकर

आसमान छूने के ख्वाब देखते हैं

वे केवल ख्वाबों में नही

हकीकत की राह पर चलते हैं


वे शेरदिल इंसान हैं

डरकर पीछे नहीं हटते

मुसीबतों से घबराते नही

डटकर उनका सामना करते हैं

क्योंकि डर के उस पार ही

हिम्मत का संसार है

और जिसने डर को जीत लिया

वही जिंदगी का असली हकदार है


✍️ पूनम लता ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

गुरुवार, अक्टूबर 15, 2026

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन ‘सिनेमा साहित्यिक महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा सिनेमा के भिन्न-भिन्न पहलुओं को दर्शाने तथा सिनेमा के महत्व का अहसास लोगों को करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन ‘सिनेमा साहित्यिक महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को सिनेमा से संबंधित दस अलग-अलग विषयों के विकल्प देकर उनमें से किन्हीं दो विषयों का चयन करके चयनित विषयों पर आधारित रचनाएं लिखने के लिए कहा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं के द्वारा सिनेमा के भिन्न-भिन्न पहलुओं को दर्शाते हुए और मनोरंजन करते हुए महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए और महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। महोत्सव में सम्मिलित प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन “पुनीत साहित्य धुरंधर” सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने सिनेमा के महत्व व विशेषता के बारे में बताते हुए‌ कहा कि सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने का महत्वपूर्ण साधन है। यदि सिनेमा जैसे सशक्त साधन का ठीक ढंग से प्रयोग किया जाए तो यह समाज के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मान पाने वाली सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने ग्रुप द्वारा आयोजित होने वाले भिन्न-भिन्न ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में रचनाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके ग्रुप की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम पूनम लता, रत्ना वाधवानी, अभिषेक सिंह कुशवाहा "अनभिज्ञ”, डोली पाठक रचनाकारों के रहे।

📜 कागज़-कलम वार्ता 🖋️

कागज़ ने कलम से कहा, “तुम मन की आवाज़, मैं मौन साधना में लिपटा, तुम शब्दों का साज़। तुम बूँद विचारों की हो, मैं धरती का वक्ष, मिलकर हम रचते ...