सोमवार, अक्टूबर 05, 2026

✨ इंसानियत✨








इंसानियत का भाव मन में जिसके

वही सच्चा इंसान कहलाता है

निस्वार्थ सेवा यदि वह करता

तो नेक इंसान बन जाता है


आज हैवानियत को अपनाकर इंसान 

समाज में अपना मुंह छुपाता है

संस्कारों की कमी सर्वत्र दिखाकर 

माता-पिता के अपमान की वजह बन जाता है 


वृक्षों से हम सीखें कि 

पत्थर खाकर कैसे किया जाता उपकार

खट्टे-मीठे फल हैं देते वे 

जिससे मिलती खुशी अपरंपार


जब इंसान ही इंसान के काम ना आता 

तो पशु समान जीवन उसका बन जाता 

जो इधर-उधर भटकता रहता

समाज में सम्मान कभी ना पाता


कौन किस धर्म जाति का है बस

यही मन में है प्रश्न महान 

असली इंसान होता है वही

चेहरे से जो भाव जो जाता जान 


धर्म की शिक्षा भूल गए सब

इंसानियत का बचा नही निशान

इंसानियत आज मुंह छिपाकर रो रही

कहां विलुप्त हो गए अच्छे इंसान


हैवानियत कर रही नृत्य चारों ओर

और इंसानियत रो रही है जोर-जोर

रिश्तों में ममता और भावनाएं हो गई हैं मौन 

धन वैभव की लालसा में आप कौन और हम कौन


आओ ! समय रहते हम जाग जाएं

इंसानियत को डूबने से बचाएं

बच्चों को नेक इंसान बनाएं

उनका और अपना भविष्य सुरक्षित बनाएं।


✍️ वसुधा श्रीवास्तव ( भोपाल, मध्य प्रदेश )

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

🍁 आओ ! बदलें अपनी आदतें 🍁

जो साफ करते हैं दूसरों का कूड़ा, उनके घरों में अक्सर अंधेरा होता है। हम तो मना लेते हैं त्योहार रोशनी में, पर उनकी सुबह का रुख कुछ और होता ह...