यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से,
तुम लाख सम्भालो दिल को,
चूके ना मनमानी से,
नदिया बहती है कल-कल,
निर्मल शीतल उसका जल,
जा मिलती बहती अविरल,
सागर के खारे पानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
कश्ती को पता है नदिया की,
लहरें हैं कितनी ज़ालिम,
इश्क करे फिर भी वह,
लहरों की आनी जानी से,
किसने दिखलाया नदिया को,
सागर का चौड़ा सीना,
यह इश्क नही तो क्या है,
जा मिलती सागर तूफानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
अपना वजूद वो खोकर,
खुद भी खारा बन जाती है,
सागर के इश्क में डूबी,
जा मिलती खारे पानी से,
श्वेत धवल वस्त्रों की रानी,
गर्वित है रत्नेश दीवानी,
खिल उठते होंठ नदी के,
मिल सागर के पेशानी से,
यह इश्क नही आसान,
पर हो जाता आसानी से।
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )

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