शुक्रवार, अक्टूबर 21, 2022

💥 मेरे मन का वो दिया 💥








सुनो....

जब लाओगे दिए 

तो ले आना 

उम्मीदें और आशाएँ भी साथ

और 

उनकी बना पोटली 

टांग लेना मन के कोने में।


हाँ...

जब बांधोगे वो पोटली 

आशा और उम्मीदों की 

तो ले लेना नाम मेरा भी चुपके से

जब कभी खोल वो पोटली बैठोगे देखने 

तो क्षण भर को ही सही

पर चमक जाएगा नाम मेरा

महसूस कराते मेरी मौजूदगी....


फिर..

धुल लेना उन दियों को 

साथ में धुल डालना  

वो कड़वी स्मृतियाँ भी 

जो मिली होंगी तुम्हें कभी मुझसे

जाने या अनजाने..

ख़ाली रखना कोना

प्रेम संचय को...


अच्छा..

बाती तो बनाओगे ही...

बनाना मनोयोग से

मुस्कुराहट रख चेहरे पर

ऐसेजैसे बुन रहे हो ताना बाना

चलने वाले अनवरत जीवन का

जिसमें कुछ पल ही सही

पर हो वो पल हमारा 

पूरी तरह से

जिसमें होंगे हम दोनों

सजाए आँखों में एक ही स्वप्न..


जलाने को दिया 

जब रखोगे बाती दिए में

तो रख देना बात अपने मन की

साथ ही उसके 

और

उड़ेल देना अपने सारे जज़्बात

उसमें उड़ेलते हुए घी के साथ

फिर देखना..

उस की लौ

मचलती हुई ना जले तो कहना...


जब जलाओगे वो दिया

तो जला देना मन के अहंकार,

क्रोधलोभलालसा सब उसके साथ

फिर देखना...

कितना सुंदर है ये जीवन

हमारे सुंदर मन के जैसे...


पर हाँ...

सुनो

जला कर वो दिया,

रख लेना हथेली पर क्षण भर को

मानो रखा हो तुमने एहसास मेरे  का

और देख लेना आँखों में भरे स्ने

उड़ेल देना सारा भाव

सारा स्नेह…

और

रख देना वो दिया 

मंदिर के कोने में

जलने देना उसे 

जैसे भी वो चाहे जलना

उसकी मर्ज़ी...

उसके मन से...


✍️ भारती राय ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )


शनिवार, अक्टूबर 15, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' की प्रतिभागी शख्सियतें सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा महिला रचनाकार शख्सियतों के उत्साहवर्धन हेतु एवं उनके मन के भावों को आदर देने के उद्देश्य से ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। जिसमें महिला रचनाकारों को अलग-अलग विषयों के विकल्प देकर उसमें से किसी एक विषय का चयन करके उस विषय पर आधारित रचना लिखने के लिए कहा गया था। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों की महिला रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से अपने मन के भावों को प्रस्तुत कर ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' की शोभा में चार चाँद लगा दिए। इस कार्यक्रम में समूह द्वारा अपने पिछले ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में मंच की शोभा बढ़ा चुकी महिला रचनाकारों को विशिष्ट साहित्यिक शख्सियत के तौर पर जोड़कर उन्हें ऑनलाइन 'पुनीत महिला गौरव' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने ऑनलाइन 'महिला रचनाकार प्रशस्ति कार्यक्रम' में प्रतिभागी रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा सम्मानित महिला रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने हिंदी रचनाकारों को आने वाले ऑनलाइन साहित्यिक महोत्सवों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम संध्या शर्मा, सुषमा पांडे, सीमा मोटवानी, राज सुराना रचनाकारों के रहे।

गुरुवार, अक्टूबर 13, 2022

🌸 प्रेम का बंधन 🌸







एक दिन की बात है यह

गिरधर उड़ा रहे थे पतंग

कुंती पुत्र अर्जुन ने देखा 

आ खड़ा हुआ हुआ उनके संग

बोले कृष्णा पूछो अर्जुन

मन में तेरे क्या चलता है

जो भी चाहो पूछो मुझसे

हृदय में क्या कुछ पलता है

अर्जुन बोला बतलाओ प्रभु

सफल जीवन क्या होता है 

जब काटा करता फसल वही 

जो पिछले जन्म में बोता है

फिर बोला वह, सुनो मुरारी 

क्यों खींच रहे पतंग की डोर

चाह रहे यह ऊपर जाए 

तो छोड़ो धागे का छोर

प्रभु ने पतंग को छोड़ दिया 

धागे का छोर तोड़ दिया

पल भर तो ऊपर गई पतंग

फिर जाने कहां गिरी पतंग

अब कृष्णा ने अर्जुन को 

जीवन का दर्शन समझाया

सफल जीवन होता है क्या

पल में पार्थ को बतलाया

यह मत सोचो जिन रिश्तो से

बंधे हो तुम, ऊँचा उड़ने से रोक रहे

माता-पिता और गुरु-समाज

सब अनुशासन को टोक रहे

ये रिश्ते भी उस धागे से हैं

जिन से जुड़ी हुई थी पतंग

जब हमने धागा तोड़ दिया

तो ऊंचाई से गिरी पतंग

सुनो पार्थ रिश्तों के धागे से

खुद को हमेशा जोड़ना

अगर चाहिए जीवन की सफलता

तो रिश्तो का धागा ना तोड़ना

       ✍️ संध्या शर्मा ( पटना, बिहार )


बुधवार, अक्टूबर 12, 2022

🌸 पहाड़ और सुंदरता 🌸







अहा" क्या सुंदरता है !!
देखो-देखो स्वर्ग यहां है !!

श्वेत गगन से मेघ करते, मानो आलिंगन !
और उनके बीच से झांकता, पर्वत का आनन !
दूर क्षितिज में धरती और आकाश का मिलन !

कितनी सुंदर घटा है !!
अहा" क्या सुंदरता है !!

दोनों ओर लंबे-लंबे, हरित वृक्ष की कतारें !
उनके क़दमों में बिखरी बर्फ, जैसे आरती उतारे !
मानो स्वागत में खड़े है, ये सुंदर से नजारे !

कितनी सुंदर छटा है !!
अहा" क्या सुंदरता है !!

सड़क नागिन सी लंबी, बल खाती हुई दिखती है !
पीत वर्ण की रेखा, माथे का टीका लगती हैं !
लगता है प्रकृति स्वागत में, कब से खड़ी हुई हैं !

कितना प्यारा नजारा है !!
अहा" क्या सुंदरता है !!

✍️ राज सुराना ( मुंबई, महाराष्ट्र )

🌸 स्त्री होना आसान नही 🌸








स्त्री  होना  आसान  नही ...
हारना  पड़ता  है  हर  मोड़  पर 
रिश्ते  संजोने के  लिए ...
 
कभी  बन  बेटी  बाबुल  की  पगड़ी
बहन होकर  भाई  की  नादानी  
बनी  जो  पत्नी  तीन  कुलों  का  मान  हमारे  कांधे  आते ...

और  फिर  भूलना  पड़ता  है  सारा  गणित ...
माँ  बन  संभाला  जिनको  उन्हीं  के  अनुसार
चलना  पड़ता  है  उम्र  के  ढलान पर ...

कब  क्यूँ  कैसे  जैसे  पीछे  रह  जाते  हैं  अनगिनत  सवाल ...
छूट  जाते  हैं  सारे  सपने  
बिखर  कर  भी  खुद  को  समेटना  कोई  आसान  नही ...
 
बन  स्त्री  प्रेम  को  तरसना  छीन  लेती  है  जीवंतता  
खुश  रहती  हूँ  फिर  भी  क्यूंकि  स्त्री  होना  आसान  नही...

कभी  मीरा  बन  विष  तो  सीता  बन  धरती  को  वरना ...
कभी  लक्ष्मी  तो  कभी  धर  रूप  चंडी  का  लड़ना ...
आँखों  में  छुपा  अश्कों  को  अधरों  पर  सजा  मुस्कुराहट  का  गहना..
  
स्त्री  का  पर्याय बन  एक  दोहरा जीवन  जीना ... 
आसान  नही...
स्त्री  होना  आसान  नहीं...

✍️ सुषमा पांडे ( बोकारो, झारखंड )

रविवार, अक्टूबर 09, 2022

🌸 मौन 🌸

मौन होने का अर्थ यह नहीं कि शब्दकोष शून्य है या मन आहत नही बस हमारी परवरिश हमारी बेड़ियां हैं जो पाबंदी लगाती हैं शब्दों की ऐसी अभिव्यक्ति पर जो प्रश्नात्मक हो, मौन सर्वोत्तम चिकित्सा के पाठ रोज़ रटाए जाते हैं पर मौन सर्वोत्तम चिकित्सा का अर्थ स्थिर, आवेशरहित, निरोगी चित क्यों नहीं बताया जाता ? अगर मनुष्य अलग तो मन भी अलग ? मन अलग तो व्यवहार भी अलग, फिर पाठ एक और पाठ्यक्रम एक जैसा क्यों ? मौन पीड़ा से आहत मन असंख्य प्रश्नों की तलहटी में निरुत्तर समाधि लेता है परंतु चीत्कार लगाती रूह निःशब्दता के हर आवरण को भेदना चाहती हैं वह स्वतंत्रता आलिंगन कर नए पाठ्यक्रम भी जोड़ना चाहती है और चेतना सागर के हर अध्याय पर एक ऐसी यात्रा करना चाहती है जहाँ मौन निःशब्द न हो


             ✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )

रविवार, अक्टूबर 02, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन महात्मा गांधी जयंती साहित्यिक महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष्य में ऑनलाइन 'महात्मा गांधी जयंती साहित्यिक महोत्सव' का आयोजन किया गया। जिसका विषय 'महात्मा गांधी और उनकी शिक्षाएं' रखा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषय पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत कर ऑनलाइन 'महात्मा गांधी जयंती साहित्यिक महोत्सव' की शोभा में चार चाँद लगा दिए और ऑनलाइन महात्मा गांधी जयंती साहित्यिक महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महोत्सव में सुषमा पांडे (बोकारो, झारखंड) और सोनी कुमारी (पटना, बिहार) द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं ने समूह का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। इस महोत्सव में सम्मिलित प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत साहित्य दीप' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को कोटि-कोटि नमन करते हुए समस्त देशवासियों को उनके द्वारा दिखाए गए सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया तथा सम्मान पाने वाली प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी रचनाकारों को समूह द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...