रचनाकारों, कलाकारों, प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली शख्सियतों को प्रोत्साहित करने का विशेष मंच।
मंगलवार, मई 17, 2022
🌻ऊंची राह🌻
सोमवार, मई 16, 2022
🌻लोगों में आया बदलाव🌻
🌻प्यार पर क्या लिखूं🌻
🌻गृहणियां🌻
प्रेम भाव में
जीती रही है गृहणियां
तज कर अपने स्वप्न
उठाती रही है जिम्मेदारियां
पति की मुस्कान में
पा लेती हैं सुकून
मां बाप के आशीष से
भर लेती हैं झोलियां
ढूंढ लाती है खुशी
जब गूंजती हैं किलकारियां
करती है समर्पण
दिन रात नही देखती
पापा की ये तितलियां
हंसती हैं, मुस्काती हैं
मन को समझाती हैं
कुछ ऐसी ही होती हैं
हम सारी गृहणियां
✍️ रीना अग्रवाल ( बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश )
रविवार, मई 15, 2022
🌻मज़दूर का करें सम्मान🌻
करोना काल में हुआ जिनका सबसे बु
वो तो मेहनत कश मज़दूर थे साहब
जो दिनभर मज़दूरी कर घर चलाया क
धूप, बरसात या हो सर्दी मेहनत से ना डरते
अपने कंधो पर कितना बोझ उठाया क
ये कैसी विपदा आन पड़ी थी तब उ
जो दो रोटी के लिए घर से निकलता
तब उसके हाथों में पानी भी नही था
अपनो को भूख से तड़पता कोई देख
वो तो एक मज़दूर है साहब जो मजबू
जो रोटी कमाने अपने घर से बाहर
आज इस तड़पन ने उसे वापस भेज दि
उसके घर के दरवाज़े जो कब से इं
एक कुंडी के सहारे उसकी राह तक
बस वो राहत की साँस लिए दिख रहे
अब हमारे घर की रौनक़ लौट आई है
घर में खाने को कम होगा फिर भी
वो दहशत और भुखमरी तो नही होगी
गाँव में उनका अपनी छत के नीचे
अपने दरवाज़े कुंडी के आग़ोश में रहना
अब उनको उसमें अपनी खुशी ढूँ
उनमें से कई रास्तों में पैरो में छाले लिए
कई रास्तों में अपने से बिछड़ते
कई लोगों ने रास्ते में ही दम तो
कोई माँ के लिए बिलख-बिलख के रो
आज हमारे पास इसका कोई जवाब भी नही
मज़दूर है जिसकी जिंदगी कश्मकश
उनकी तड़पती आँखो में देखा भी न
कई बच्चे ऐसे भी थे जिनके हौ
अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा
घर तक पहुँचाने की हिम्मत बाँध
मज़दूर है जिनके बिना चले ना को
इसलिए मज़दूर का भी करे प्रत्येक व्यक्ति सम्मान
✍️ ज्योति पां
🌻मज़दूर🌻
🌻श्रमिक🌻
परिश्रम करता वो नित्य है,
तपती दोपहरी काम करे,
कभी ना उसको आराम मिले।
रात-दिन उसके सब एक है,
मन में उसके ना कोई भेद है,
है हक़दार उच्च सम्मान का,
ना निश-दिन के ही अपमान का।
रोटी को रहा जो तरसता,
बेवजह किसी पर ना बरसता,
घर की चिंता सताए उसे,
मुश्किल अपनी बताए किसे ?
श्रमिक, किसान, शिल्पकार है,
वो जगत का तो भरतार है,
बिन उसके ना कोई देश है,
दयनीय सा उसका वेश है।
प्रभु से नित करूं मैं प्रार्थना,
करना ना उस पर दुःख की गर्जना,
उसे जग में उचित सम्मान मिले,
फिर ना कभी जग में अपमान मिलें।।
✍️ प्रिया अवस्थी शर्मा 'शब्दिता' ( बालाघाट, मध्य प्रदेश )
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।
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