मंगलवार, सितंबर 06, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन शिक्षक दिवस साहित्यिक महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन 'शिक्षक दिवस साहित्यिक महोत्सव' का आयोजन किया गया। जिसका विषय 'शिक्षक का महत्व' रखा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषय पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत कर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए। इस महोत्सव में रचनाकारों ने एक ओर जहां अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षक दिवस के इतिहास के बारे में बताया तो दूसरी ओर शिक्षकों के प्रति भी उन्होंने अपने असीम स्नेह और श्रद्धा भावना को प्रकट किया। महोत्सव में सम्मिलित सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत शिक्षा ज्योति' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने महान शिक्षक तथा भारत देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के व्यक्तित्व व किए गए महान कार्यों को कोटि-कोटि नमन करते हुए शिक्षक दिवस की बधाई व शुभकामनाएं दी तथा महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया। उन्होंने हिंदी रचनाकारों को समूह द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न ऑनलाइन साहित्यिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम चंचल जैन, सीमा मोटवानी, सुनीता सोलंकी 'मीना', कुसुम अशोक सुराणा, रंजन लाल 'बेफिक्र', सम्पदा ठाकुर रचनाकारों के रहे।

सोमवार, सितंबर 05, 2022

👩‍🏫 उज्ज्वल भविष्य का रच्चणहार 👩‍🏫









वक़्त के चक्के पर दे आकार,
मिट्टी के गोले का सृजनकार,
उज्ज्वल भविष्य का रच्चणहार,
जीवन-नैया का खेवनहार,
हीरे का पारखी, जौहरी होनहार,
तराशने में माहिर, शिल्पकार।

अंधियारी रातों में जलता दीया,
स्नेह की ज्योति, वात्सल्य हीया,
भटके पथिक का साथी-साया,
सरवर में खिला ब्रह्मकमल मन भाया,
अंतर के स्पंदन का आर्तनाद,
अभिभावक का त्याग, प्यार, संवाद।

जीवन वीणा का कोमल साज,
राष्ट्र का स्वाभिमान, राष्ट्र का नाज़,
भूतकाल की धरोहर, भविष्य का निवेश,
आशीर्वाद की गठरी, उज्ज्वल परिवेश,
शिक्षकगण, शिक्षाविद्, शिल्पकार,
निर्माता, निर्देशक, नव ज्ञान भंडार।।

✍️ कुसुम अशोक सुराणा ( मुंबई, महाराष्ट्र )



👩‍🏫 गुरू को नमन 👩‍🏫








जिस गुरु के ज्ञान का 
ना आदि है ना अंत है 
ऐसे गुरुवर को मेरा 
सादर नमन है 
आपकी शिक्षा से ही 
सब होते हैं शिक्षित 
भले और बुरे का भेद समझते 
होते हैं संसार से परिचित 
अज्ञान का अंधकार मिटाकर 
भरते हैं जीवन में ज्ञान का उजाला 
इसलिए माता-पिता से भी पहले
गुरु का नाम है आता 
बनकर आदर्शों की मिसाल 
बच्चों का भविष्य संवारते 
जीवन के पथ पर हमेशा
हमें संघर्षों से लड़ना सिखाते
पाप, लोभ से हमें बचना सिखलाते 
सत्य, न्याय की राह पर
सदा हमें चलना सिखलाते
इंसान और जानवरों में भला 
हम भेद कहां समझ पाते 
जो जीवन में गुरु ना होते
गुरु के कारण ही होता 
हम सबका तन-मन पावन 
हे ! गुरुवर आपके चरणों में 
"सम्पदा" का शत-शत नमन।
             
✍️ सम्पदा ठाकुर ( मुंगेर, बिहार )

रविवार, सितंबर 04, 2022

👩‍🏫 जीवन सबसे बड़ा शिक्षक 👩‍🏫

जीवन से प्राप्त हुए अनुभव हमें बहुत कुछ सिखाते है। हमारा मार्गदर्शन करते हैं और यह अनुभव हर किसी के जीवन मे सार्थक भूमिका निभाते हैं। पग-पग पर नए अनुभव जीवन को नए आयाम देते हैं। स्कूल-कॉलेज में मिलने वाला ज्ञान बहुत कुछ सिखाता है पर व्यवहारिक तौर पर अपूर्ण होता है। हम अपने अनुभवों से जीवन पर्यन्त कुछ नया प्राप्त करते हैं। हम जब अपने कदम कठिनाइयों की सीढ़ी पर रखते हैं तो सफलता तथा विफलता दोनों ही हमारे गुरु बनते हैं। सफल व्यक्ति दूसरों को अपने अनुभव से सिखाता है और विफल व्यक्ति हर बार एक नए अध्याय से जुड़ जाता है। जीवन की प्रथम श्वास से अंतिम क्षण तक की यात्रा हमारी शिक्षक बनती हैं इसलिए मेरे लिए जीवन से बड़ा कोई शिक्षक नही है। मेरी तरफ़ से इस अनमोल "जीवन" को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। जो हमें रोज़ नये-नये अनुभव करवाकर बेहतर से भी बेहतर साँचे में ढाल रहा है।


                         ✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )

👩‍🏫 गुरु महिमा 👩‍🏫







छोड़ कर सदगुरु शरण तेरी मैं जाऊं किस तरह।
आपसे क्या क्या मिला ये भी बताऊं किस तरह।।

राह दिखलाई मुझे हर जिंदगी के मोड़ पर,
एहसानों को सभी अब भूल जाऊं किस तरह।।

जो बताया आपने वो ही लिखावट छप गई,
ज्ञान अंतर्मन छपा है जो वो मिटाऊं किस तरह।।

आज कितने काम आते हैं दिशा निर्देश सब,
आज कृतज्ञ हूं कितना ये दिखाऊं किस तरह।।

लोग कुछ अज्ञानता के इक भँवर में हैं फँसे,
आपकी शिक्षा सभी पर आज़माऊं किस तरह।।

ये सबक है आपका मत कर बहस अज्ञानी से,
ज्ञान सारा कीमती उन पर लुटाऊं किस तरह।।

हो गया "बेफिक्र" हूं विश्वास कर के आप पर,
प्रश्न इस विश्वास पर आखिर उठाऊं किस तरह।।

    ✍️ रंजन लाल 'बेफिक्र' ( इंदौर, मध्य प्रदेश )

शनिवार, सितंबर 03, 2022

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा आयोजित ऑनलाइन रिश्ते विशेष साहित्यिक महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम साहित्यिक समूह द्वारा मनुष्य के जीवन में रिश्तों के महत्व और उपयोगिता को दर्शाने के लिए ऑनलाइन 'रिश्ते विशेष साहित्यिक महोत्सव' का आयोजन किया गया। जिसका विषय 'रिश्ते होते हैं विशेष' रखा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषय पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत कर ऑनलाइन 'रिश्ते विशेष साहित्यिक महोत्सव' की शोभा में चार चाँद लगा दिए और ऑनलाइन रिश्ते विशेष साहित्यिक महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महोत्सव में रंजन लाल 'बेफिक्र' (इंदौर, मध्य प्रदेश) और सीमा मोटवानी (अयोध्या, उत्तर प्रदेश) द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं ने समूह का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। महोत्सव में सम्मिलित सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत साहित्य सरिता' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने मनुष्य के जीवन में रिश्तों के महत्व तथा उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए, सभी लोगों को प्रत्येक रिश्ते को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रेरित किया और महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया और सम्मान पाने वाले सभी प्रतिभागी रचनाकारों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी रचनाकारों को आने वाले ऑनलाइन साहित्यिक महोत्सवों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके समूह की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम सीमा मोटवानी, शशि कुरील, रंजन लाल 'बेफिक्र' सविता 'सुमन', सम्पदा ठाकुर, भारती राय रचनाकारों के रहे।

गुरुवार, सितंबर 01, 2022

👩‍🏫 किसे-किसे बधाई दूँ 👩‍🏫








टीचर्स डे पर किसे-किसे बधाई दूँ 
किस ने क्या सिखाया किसे दुहाई दूँ

तरह-तरह के मिलते रहे टीचर्स 
कुछ भोले-भाले और कुछ चीटर्स

कुछ ने अक्षर, कुछ ने ज्ञान सिखाया
कुछ ने मनुष्य की पहचान सिखाया

कुछ ने अपना पराये का एहसास 
बेगाने अपने कहीं अपने रहें पास

कोई सहेली बनकर सीखा जाती 
कोई शिष्य बनकर सीखा जाती 

कोई बराबरी करके सीखा जाए 
कोई पीछे धकेल कर सीखा जाए 

सीख लेना व पाठ पढ़ना सब एक है 
मिनटों में लगा बुझा पढ़ा देना अनेक है 

कभी-कभी टीचर्स मिले भी भले 
उनसे हम कुछ भी ना सीख सके

काॅपी इतनी सुन्दर बना कर रखते 
मगर उसमें लिखे अक्षर ना पढ़ते

भर-भर काॅपी लगा रखते थे चट्टे
मगर दिमाग खाली पड़े पत्थर बट्टे 

ऐ जिंदगी मेरी तो मास्टर तू ही रही है 
रोज़ाना दिमाग पर दही जमी रही है 

जब भी विश्वास किया के सीख लिया है 
हुनर की परीक्षा ले तूने नया विषय दिया है

कायदे के काले पन्ने पे लाके छोड़ती 
ए.बी.सी.डी. से शुरुआत कराती  

मंझले आकार की छात्रा रहे हम 
पास करने में निकलता रहा दम 

ऐ जिंदगी तू हमसे पार कैसे होगी 
तुझे समझने की समझ कब होगी 

जिंदगी तेरे सफ़हों की गिनती नही 
कभी सूची तालिका ही भरती नही

सबके टीचर्स है, आदर्श हैं, गुरू हैं 
ऐ जिंदगी मेरी जिंदगी तुझसे शुरू है

थी कभी जो नादाँ मासूम अल्हड़पन में 
जिंदगी उसे बहुत सीखा गयी बचपन में 

कुछ सचमुच होते ही हैं टीचर्स अच्छे 
उन्हें न सुनने का लालच कि हम अच्छे

कोई तोहफ़े उन्हें करें लालायित नही
पढ़ो, खाओ, पीओ, खेलो सीखो यही

गुरू दक्षिणा देना तुम होकर काबिल 
आज सिर्फ वही जो तन्खाह में शामिल

✍️ सुनीता सोलंकी 'मीना' ( मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश )

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...