मिट्टी था मिट्टी में वो मिल गया,
प्रकृति तूने ये क्या किया ?
मिट्टी का घर मिट्टी में मिला दिया!
मेरी उसमें आस थी,
जीने की सांस थी,
आशाओं की पहली किरण थी,
उम्मीदों की पहली चरण थी,
आसमान के तले एक छत दिया
और मिट्टी में फिर मिला दिया!
दीवारें जर्जर हुई थी,
दरारें भी पड़ने लगी थी,
बारिश की बूंदों का कहर
दरारों से झरने लगी थी,
तूफानी वर्षा ने दीवारें ढाह दिया,
और मिट्टी का घर मिट्टी में मिला दिया!
डेहरी टूटी,छानी भी टूटा,
और भित्ती भी रूठ गया,
घाव बहुत गहरा लगा
घुमड़ते मेघों ने हमको डरा दिया,
झमझम बारिश की बूंदों ने
जीवन हमारा बिखरा दिया,
मिट्टी का घर मिट्टी में ही मिला दिया!
बेहाल हुआ जीना दुश्वार हुआ,
जिनके भी घर मिट्टी के हैं,
उनका यही सब हाल हुआ,
अस्त व्यस्त हुआ जीवन ये-
मुश्किल बड़ा हालात हुआ,
ऐ वर्षा तूने जीना बेहाल किया,
मिट्टी का घर मिट्टी में मिला दिया!
मेरा हक था जो चला गया,
मिट्टी था मिट्टी में ही मिल गया,
प्रकृति तूने ये क्या किया ?
मिट्टी का घर था मिट्टी में मिला दिया!
✍️ डॉ. उमा सिंह बघेल ( रीवा, मध्य प्रदेश )
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