माँ, माता, ममता, ममत्व
इन नामों में छिपा प्यार एक ही है
बच्चे के मुख से निकला
पहला शब्द माँ ही है
अपने ममता के आँचल का
छाँव दे, लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
जिसके आँचल में है
ममता भरा प्यारा संसार
और सीने में हो वात्सल्य बेशुमार
माँ है वह ममता की सूरत महान।
सबके जीवन में माँ अनमोल है
जो जीवन के पग-पग पर देती साथ है
कभी नही होने देती जीवन में निराशा है
ऊँगली पकड़ हमें चलना सिखाया
लोरी गा कंधे पर झुलाया
जब कदम थे मेरे लड़खड़ाए
आपने ही थामा हाथ मेरा
जगा आत्मविश्वास मेरे अंदर
खड़ी की मेरे भविष्य की इमारत
आज हूँ मैं जिन बुलंदियों पर
उसका श्रेय माँ सिर्फ आपको अर्पण
माँ की जब बात आती है
एक और चेहरा उभर आता सामने
जो कहलाती है सासु माँ।
मेरी नज़र में दोनों हैं माँ
जब दिया माँ का दर्जा
फिर दोनों के बीच भेद कैसा
एक देवकी है तो एक है यशोदा
जिस माँ ने जाया
उन्होंने संस्कार दिया
जिस सासु माँ ने अपनाया
उन्होंने जीवन साथी दिया
आँखों में खुशी-गम के
हसीन सपने संजोये
नए घर को रूख्सत हुई
जीवन साथी ने दिया सहारा
सासु माँ ने गले लगाया।
घर की लक्ष्मी, बहू, अन्नपूर्णा कह
औरों के बीच मेरा परिचय कराया
मैंने खुद को धन्य माना
माँ का दूसरा रूप जो पाया
हर विषमता के बीच थामा मेरा हाथ
दे सहारा हमें सबल बनाया
नारी एक पर उसके रूप अनेक हैं
नारी ही नारी की पहचान है
एक माँ है तो दूसरी सासु माँ हैं।
✍️ पूनम लता ( धनबाद, झारखंड )






