शनिवार, जुलाई 08, 2023

🤱 माँ 🤱









माँ, माता, ममता, ममत्व 

इन नामों में छिपा प्यार एक ही है

बच्चे के मुख से निकला

पहला शब्द माँ ही है

अपने ममता के आँचल का 

छाँव दे, लोरी गाती

मेरे सपनों को सहलाती

जिसके आँचल में है

ममता भरा प्यारा संसार

और सीने में हो वात्सल्य बेशुमार

माँ है वह ममता की सूरत महान।

 

सबके जीवन में माँ अनमोल है 

जो जीवन के पग-पग पर देती साथ है 

कभी नही होने देती जीवन में निराशा है

ऊँगली पकड़ हमें चलना सिखाया 

लोरी गा कंधे पर झुलाया 

जब कदम थे मेरे लड़खड़ाए

आपने ही थामा हाथ मेरा

जगा आत्मविश्वास मेरे अंदर

खड़ी की मेरे भविष्य की इमारत

आज हूँ मैं जिन बुलंदियों पर

उसका श्रेय माँ सिर्फ आपको अर्पण

माँ की जब बात आती है

एक और चेहरा उभर आता सामने

जो कहलाती है सासु माँ।

 

मेरी नज़र में दोनों हैं माँ 

जब दिया माँ का दर्जा 

फिर दोनों के बीच भेद कैसा

एक देवकी है तो एक है यशोदा 

जिस माँ ने जाया

उन्होंने संस्कार दिया

जिस सासु माँ ने अपनाया

उन्होंने जीवन साथी दिया

आँखों में खुशी-गम के

हसीन सपने संजोये

नए घर को रूख्सत हुई

जीवन साथी ने दिया सहारा 

सासु माँ ने गले लगाया। 


घर की लक्ष्मी, बहू, अन्नपूर्णा कह

औरों के बीच मेरा परिचय कराया 

मैंने खुद को धन्य माना 

माँ का दूसरा रूप जो पाया

हर विषमता के बीच थामा मेरा हाथ

दे सहारा हमें सबल बनाया 

नारी एक पर उसके रूप अनेक हैं 

नारी ही नारी की पहचान है 

एक माँ है तो दूसरी सासु माँ हैं।


✍️ पूनम लता ( धनबाद, झारखंड )

🦚 शिक़वे-गिले जिंदगी के 🦚









कभी पलट कर देखना 
तुम जिंदगी को
कुछ छूटा तो नही
कहीं बीच रास्ते में
कोई ख़लिश तो नही
रह गई इस दिल में
फिर मुड़ के भी देखना 
इस सफ़र को
कि तुमको
कितनी शिकायतें
हैं जिंदगी से 
पर ! क्या जिंदगी ने
कभी तुमसे कोई
शिकायत की 

तुम कब राज़ी हुए 
इसके फैसलों से
कि जो मिला, अच्छा मिला
तुम बेहतर की चाह में 
छोड़ते गए सुकून को
वो सुकून तुम्हारे
मन की चौखट पर
खड़ा रहा इस इंतजार में
कि तुम खोल दरवाजा 
उसको लगा सीने से
भूला दोगे वो शिक़वे-गिले
जो जिंदगी से तुमने किए।

✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )

शुक्रवार, जुलाई 07, 2023

💞 तुम 💞









मेरी जिंदगी मेरी खुशी है तू

सबसे खूबसूरत ख्वाब

मेरी खवाहिश मेरा जनून है तू

मेरे चेहरे की हसी है

आंखों का सुकून है तू

रब की दी नेमत है तू

पिछले जनम का कोई रिश्ता है तू


सारा समंदर है पास मेरे पर

आंखों में फिर भी इक प्यास है

सारी नेमते है पास मेरे फिर भी

बस तुझे ही पाने की आस है

इक पत्थर में जान फूँक दी

दिल को धड़कना सीखा दिया


जमीं पर चलना भी न आता था

तूने तो उड़ना सीखा दिया

ख्वाहिशो को पंख दिए 

अरमानो को जगा दिया

कौन है तू आया कहाँ से है

सूनी सी जिंदगी को जीना सीखा दिया


तेरा शुक्रिया करूँ कि

तुझको सज़दा करूँ

या सबकुछ ही तुझ पर वार दूँ

मेरी सांसों का हर इक कतरा

बस तेरा ही तेरा है

तुम्हें देखा तुम्हें चाहा

तुम्हीं को दिल भी दे डाला


अब अरमान है इतना कि

तुम मेरे सामने आओ

कुछ तुम कहो, कुछ हम कहें

इकरार हो जाए

मिट जाए सारी दूरियां 

और प्यार हो जाए……


तुम्हारे ख्यालों से 

फुर्सत नही मिलती,

एक पल के लिए हमें

राहत नही मिलती

यूँ तो सब कुछ हमारे पास है

बस देखने के लिए

आप की सूरत नही मिलती…


✍️ शुभांजली शर्मा ( यमुना नगर, हरियाणा )

❣️ प्रेम मिलन ❣️







सुनो, मुझसे मिलो

और 

मुझे कसकर बांध लो 

अपनी बाहों में

मैं तुम्हारी शर्ट के कांधे को 

भिगो देना चाहती हूँ

इन आंसुओं से


मैं तुम्हारे आलिंगन में 

जार-जार रोऊंगी

तब तुम घबरा कर 

मेरे चेहरे को मत उठाना

अपने हाथों से 


बस गिन के अलग कर देना 

कुछ मिलन के

कुछ विरह के आंसू

और बिखेर देना

आसमान पर 

एक परत इसकी भी 

जो विरहाकुल प्रेमियों की 

प्यास को बुझायेंगे 

तृप्त करते रहेंगे 

सदियों तक।।


✍️ अमिता अनुत्तरा ( जोधपुर, राजस्थान )

बुधवार, जुलाई 05, 2023

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन कला प्रतिभा नमन कार्यक्रम के प्रतिभागी कलाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा‌ प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऑनलाइन कला‌ प्रतिभा नमन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सभी तरह के कला के जानकार या‌ कला में माहिर कलाकारों को अपनी कला विडियो रूप में लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर दिया गया। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों के कलाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दी गई भिन्न-भिन्न कलाओं में से अपनी इच्छा से एक कला का चयन करके चयनित कला में एक से बढ़कर एक बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम की शोभा में चार चाँद लगा दिए और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस कार्यक्रम में सम्मिलित सभी कलाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत कला भास्कर' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई भिन्न-भिन्न कला प्रतिभाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर कलाकार शख्सियतों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा प्रतिभागी कलाकार शख्सियतों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप द्वारा आयोजित होने वाले भिन्न-भिन्न ऑनलाइन‌ कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रतिभाशाली लोगों को सादर आमंत्रित भी किया। इस कार्यक्रम में बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर ग्रुप की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम कविता कोठारी, शुभांजली शर्मा, अमिता अनुत्तरा के रहे।

सोमवार, जुलाई 03, 2023

👸 बेटियाँ 👸









घर आंगन को संवारती-सजाती

खिलखिलाती है बेटियाँ

पिता की लाडली, मां की सखी

बन जाती हैं बेटियाँ

प्यार, स्नेह, ममत्व लुटाती

ज्यादा कहां है मांगती

थोड़े में ही खुश हो जाती हैं बेटियाँ।


हर सपना साकार करूं

रोशन मात-पिता का नाम करूं

जाने कितने सपने संजोए 

जीना सीख जाती है बेटियाँ

मां का आंचल छोड़

घर दूसरे भी स्नेह अपनत्व से

बस जाती हैं बेटियाँ

है रास्ते कठिन और कांटे भी बहुत

चरित्र के तराजू में तोली जाती है बेटियाँ।


क्रूर समाज का

वीभत्स चेहरा एक यह भी

रिश्तो की पवित्रता रख ताक पर

देह से नोची जाती है बेटियाँ

भेदभाव, उपेक्षा मन में दबी

किसी चिंगारी सी ज्वलंत हो कभी

राह भटक जाती है बेटियाँ।


हो कितने भी भयानक हादसे यहां

डरती नही अपने हिस्से का आसमान

ढूंढने निकल जाती है बेटियाँ

विपरीत परिस्थितियों से लड़कर 

आस निराश से जूझकर

वीरांगना बन जाती हैं बेटियाँ

मुश्किलों के बाद भी कहां घबराती

हैं हृदय से कोमल, सृजन से विकसित

ईश्वर की अद्भुत कृति

प्रकृति के सौंदर्य का उपहार है बेटियाँ।। 


✍️ प्रतिभा सागर ( शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश )

🌸 जिंदगी 🌸









जिंदगी तू भी क्या चीज है 

मैं तो बस यही जानती 

तू बड़ी हसीन है

दो पल की जिंदगी में

बचपन बीता आई जवानी

बुढ़ापे के बाद खत्म हुई कहानी। 


पर तेरे धूप-छाँव के खेल में 

बेचैनी होती है 

तू कभी हँसाती तो

कभी रूलाती है

दुनिया के रंगमंच पर 

समय के थपेडों संग 

तेरा खेल निराला है।


गम है उस पल का

जब किसी ने मेरा साथ छोड़ा था

जब टूट चुकी थी अपने जीवन में

तब दी थी आवाज़ तुम्ही ने 

जगा मेरे अंदर आत्मविश्वास 

मुझमें किया नवजीवन का संचार

जब मैंने नज़र दौड़ाई

खुद को अकेले पाया

अपनों की ही भीड़ में 

तब मैंने तेरी कीमत पहचानी।


बीते कल की बात छोड़ 

वर्तमान को जीने की ठानी 

मेरी है अब यही ख्वाहिश 

जिंदगी के प्यार की कहानी लिखें 

नफ़रत, द्वेष का दामन छोड़ 

प्यार के मीठे बोल बोलें 

खाली हाथ आए थे 

खाली हाथ जाना है। 

रखा क्या है इस जीवन में

कुछ मीठे बोल बोलें 

और प्यार लुटाते चलें।


रिश्तों के अपनेपन के पहिए से

जिंदगी का सफ़र यूँ ही चलता रहे 

तुझसे है मेरी इतनी गुज़ारिश ऐ जिंदगी

देना मुझे इतनी शक्ति

कर सकूँ सबकी ख्वाहिश पूरी

शुक्रिया ऐ जिंदगी, शुक्रिया ऐ जिंदगी।।


✍️ पूनम लता ( धनबाद, झारखंड )

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा सावन आगमन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को सावन ...