पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऑनलाइन 'प्रतिभा नमन महोत्सव' का आयोजन किया गया। जिसमें सभी तरह के कला के जानकार या कला में माहिर कलाकारों को अपनी कला विडियो रूप में लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर दिया गया। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों के कलाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दी गई भिन्न-भिन्न कलाओं में से अपनी इच्छा से एक कला का चयन करके चयनित कला में एक से बढ़कर एक बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए और महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महोत्सव में बेहतरीन कला प्रतिभा प्रस्तुत करने वाली कलाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत प्रतिभा श्रेष्ठ' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने महोत्सव में प्रस्तुत की गई भिन्न-भिन्न कला प्रतिभाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर कलाकार शख्सियतों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा प्रतिभागी कलाकार शख्सियतों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप द्वारा आयोजित होने वाले भिन्न-भिन्न ऑनलाइन कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रतिभाशाली लोगों को सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में बेहतरीन कला प्रतिभा प्रस्तुत करके ग्रुप की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम पूनम लता तथा स्नेहा बिष्ट के रहे।
रचनाकारों, कलाकारों, प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली शख्सियतों को प्रोत्साहित करने का विशेष मंच।
शनिवार, अगस्त 05, 2023
🌀 तिमिरमय रात 🌀
चाँद तुम भी तो
नही थे साथ में
उस तिमिरमय रात में
ठिठक-ठिठक बढ़े कदम
राह निहारे राह में
मन बोझिल चिंतित सा
ठगा रह गया विचलित सा
देख रंग दुनियां के
रहने लगा अब कुंठित सा
अब किस से कहूं
यह पीड़ा अपनी
क्या मुक्त करूं
अब मीरा अपनी
कोई विष भी नही
हैं अधरों पर
क्यों अचेत हूँ
फिर कोई चेत नही
मन आसमां छोड़
धरातल पर लगा
जैसे बबूल पेड़
घर आंगन में उगा
शूल ऐसे चुभे पाँव में
चाँद तुम भी तो
नही थे राह में….
✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )
सोमवार, जुलाई 24, 2023
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन कला बहार महोत्सव की प्रतिभागी कलाकार शख्सियतें सम्मानित।
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन कला बहार महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें सभी तरह के कला के जानकार या कला में माहिर कलाकारों को अपनी कला विडियो रूप में लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर दिया गया। इस महोत्सव में कई कलाकार शख्सियतों ने भाग लिया। जिन्होंने दी गई भिन्न-भिन्न कलाओं में से अपनी इच्छा से एक कला का चयन करके चयनित कला में एक से बढ़कर एक बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए और महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महोत्सव में बेहतरीन प्रतिभा प्रदर्शित करने वाली कलाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत कला गौरव' सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने महोत्सव में प्रस्तुत की गई भिन्न-भिन्न कला प्रतिभाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर कलाकार शख्सियतों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया तथा प्रतिभागी कलाकार शख्सियतों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप द्वारा आयोजित होने वाले भिन्न-भिन्न ऑनलाइन कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रतिभाशाली लोगों को सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर ग्रुप की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम रंजीता अवस्थी और रुचि गुप्ता के रहे।
रविवार, जुलाई 16, 2023
🌸 मित्रता 🌸
मित्रता एक सुन्दर बंधन है,
जो दिल और आत्मा का आबंध है।
सबसे प्यारा है यह रिश्ता,
दोस्ती का हमारा रिश्ता।
मित्र के अभाव में इंसान का,
जीवन अधूरा रहता।
मित्रता का हम पाठ हैं पढ़ते,
जीवन पथ पर आगे बढ़ते।
मित्रता तो जीवन का,
खूबसूरत उपहार है।
जिसका रूप,
सब रिश्तों से अनोखा है।
जिसे मिल जाए ,
वो तन्हाई में खुश है।
न मिले तो वह,
भीड़ में भी अकेला है।
मित्रता एक वरदान है,
जो एक तरफा नही होती।
एक दूजे पर विश्वास,
प्रेम ही है इसका आधार।
कृष्ण-सुदामा के प्रेम ने कराई
मित्रता के महत्व की पहचान मुझे।
एक प्यारा सा दिल है,
जिसमें नफरत का नाम नही।
एक प्यारी सी मुस्कान है,
जो कभी फीकी नही पड़ती।
मित्रता का अहसास,
जो कभी दुख नही देता।
एक ऐसा रिश्ता,
जो कभी खत्म नही होता।
सच्ची मित्रता में होती सहानुभूति,
प्रेम, सहनशीलता, संवेदना।
सच्चा मित्र बुरे वक्त में बनकर सहारा,
पार कराता तूफानों का किनारा।
दिल में न होती बदले की भावना,
सुख-दुख में सदा साथ होते हमारे।
वही होती सच्ची मित्रता की पहचान।
मित्रता जीवन का उपवन है,
जिसमें रंग-बिरंगे फूलों के समान,
सच्चे मित्र होते।
ईश्वर से है इतनी विनती,
सदा हरा-भरा रहे,
हमारी मित्रता का उपवन।।
✍️ पूनम लता ( धनबाद, झारखंड )
💗 ख्वाहिश 💗
दिल के एक कोने में,
छुपी थी मासूम सी ख्वाहिश,
जिसे चाहा है दिल ने मेरे,
जिसे पूजा है हृदय ने मेरे,
वह सदा दिल में ही बसेगा,
इक ख्वाब के जैसे,
ख्वाबों की ताबीर बन,
मेरी धड़कन में समाएगा,
मेरे ख्वाबों की दुनिया का,
शहंशाह बनेगा वह।
उस मासूम ने देखे थे,
सुनहरे ख्वाब कुछ ऐसे,
लगी जब हाथ में मेंहदी,
ख्वाहिशें फूल सी महकीं,
डोली जब उठी उसकी,
ख्वाब तूफान बन मचले,
पिया का साथ होगा अब,
प्रियतम के पास रहूंगी मैं।
पर ख्वाब तो बस ख्वाब होते हैं,
जो बैठकर डोली में,
ख्वाबों को लेकर निकली थी,
धराशाई हुए वह ख्वाब,
क्योंकि वह पराई थी,
पग-पग पर ख्वाब थे टूटे,
तिल-तिल कर वह मरी हर दिन,
एक दिन ऐसा भी था आया,
चिता की आग में जब जली थी वह।।
✍️ डॉ० कंचन शुक्ला ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )
⏲️ समय का समीकरण ⏲️
बदल जाते हैं
समय के साथ
बड़े-बड़े समीकरण
अब तो समय के साथ
बदल जाती हैं
पत्थर की लकीरें भी…
टूट जाते हैं
वो रिश्ते
बिछड़ जाते हैं
वो हमकदम
जिनको मनुष्य मानता है
अपने सुख की हँसी
और दुःख की
मुस्कुराहट…
जो हर क्लेश हर लें
खो जाते हैं
वो नाते-रिश्ते
समय के वीराने में
निगल जाता है सबको
समय का अजगर…
निशान तक मिट जाते हैं
उन कदमों के उन पैरों के
जो हृदय की पगडंडी पर
अंकित होते हैं
अमिट छाप की तरह
वो निशान जिनको
मनुष्य मानता है
अपना विश्वस्त साथी…॥
✍️ भारती राय ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )
💢 बीमार मानसिकता 💢
बेदर्दी से चोट पर चोट खाते
वहशीपन के शिकार-निरीह, मूक,
नैसर्गिक बसेरे से दूर, निराधार,
हमारी क्रूरतावश हो रहे कुर्बान।
स्वादेंद्रियों की करते तुष्टि
छोड़ न पाएँ अपनी पशुवृत्ति।
लोलुपतावश निर्दोषों की बलि
दुस्साह क्यों कर किया हमने ?
उर्जा पीड़ा, आक्रोश, घृणा की
दे सकती कैसे, शांति ओ खुशी।
बर्बर, संवेदनहीन, अनुभूतिशून्य,
करते निकृष्ट आचरण निरंकुश।
भक्षक नही, रक्षक बनें हम,
प्रेम ओ सहिष्णुता भर उर में।
सहचर इस धरा पर हम सभी।
कुदरत की सुंदर रचना है यह भी।
✍️ कविता कोठारी (कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।
पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा सावन आगमन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को सावन ...
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बन जाते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी जो बांध देते हैं, हमें किसी से भी कुछ रिश्ते ईश्वर की देन होते हैं कुछ रिश्ते हम स्वयं बनाते हैं। बन जाते हैं ...
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पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों को स्नेह के महत्व और विशेषता का अहसास करवाने के उद्देश्य से ऑनलाइन स्नेह ध्येय सृजन महोत्सव का आयोजन किया गया...
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जीवन में जरूरी हैं रिश्तों की छांव, बिन रिश्ते जीवन बन जाए एक घाव। रिश्ते होते हैं प्यार और अपनेपन के भूखे, बिना ममता और स्नेह के रिश्ते...






