गुरुवार, अगस्त 17, 2023

⛲ वर्षा ऋतु आई है ⛲









मौसम ने ली अंगड़ाई है

काली घटा छाई है

वर्षा ऋतु आई है।


काले काले बादलों का मेला आया

नन्ही-नन्ही बुंदिया पड़ने लगी

कोयल कूंह-कूंह गाए 

पपीहा पीहू पीहू बोले

मोर-मोरनी नाच दिखाएं 

प्रकृति में बहार आई है

काली घटा छाई है

वर्षा ऋतु आई है।


चलो री सखी झूला झूले

मौज मस्ती करने चलें

करके सोलह श्रृंगार 

कभी चूड़ी खनकाऊं

कभी पायल झनकाऊं

कभी खुद को रिझाऊं

कभी खुद इतराऊँ

हरी-हरी चुनरी पर 

बहार आई है

काली घटा छाई है 

वर्षा ऋतु आई है।


पहला झूला दादी मां के

आंगन में झूला

अमवा की डाली पर झूला

मम्मी पापा की बाहों में झूला

लंबी-लंबी पींगे थी

आसमान छूने की 

ना जाने क्यों आज 

बचपन की याद आई है

काली घटा छाई है

वर्षा ऋतु आई है।


✍️ रजनी वर्मा ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

बुधवार, अगस्त 16, 2023

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्य अलंकरण महोत्सव के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा लोगों में साहित्यिक रूचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से ऑनलाइन साहित्य अलंकरण महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को दस अलग-अलग विषयों के विकल्प देकर उनमें से किन्हीं दो विषयों का चयन करके चयनित विषयों पर आधारित रचनाएं लिखने के लिए कहा गया। इस महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों के रचनाकारों ने भाग लिया। जिन्होंने दिए गए विषयों पर आधारित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं को प्रस्तुत कर महोत्सव की शोभा में चार चाँद लगा दिए और महोत्सव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महोत्सव में एक ओर जहां वरिष्ठ रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट साहित्यिक शैली का प्रदर्शन किया तो दूसरी ओर ग्रुप से जुड़े नवीन रचनाकारों ने भी अपनी अनूठी भावनाओं और विचारों से ग्रुप का ध्यान आकर्षित किया। महोत्सव में सम्मिलित सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को ऑनलाइन 'पुनीत साहित्य भूषण' सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष पुनीत कुमार जी ने महोत्सव में प्रस्तुत की गई रचनाओं पर अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया देकर रचनाकारों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया और सम्मान पाने वाली सभी प्रतिभागी रचनाकार शख्सियतों को उज्ज्वल साहित्यिक जीवन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को ग्रुप द्वारा आयोजित होने वाले भिन्न-भिन्न ऑनलाइन कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सादर आमंत्रित भी किया। इस महोत्सव में उत्कृष्ट रचना प्रस्तुत करके ग्रुप की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख नाम सीमा मोटवानी, प्रतिभा सागर, कविता कोठारी, रजनी वर्मा, बबिता ओबराए, गरिमा रचनाकारों के रहे।

रविवार, अगस्त 13, 2023

💞 दोस्ती का रिश्ता 💞









हर सुख दुख में जो साथ चले

वही सच्चा दोस्त होता है 

हर बात जो मान जाए‌ वो दोस्त होता है,

अगर हम रूठ जाए तो हमे मना लेता है 

हमारे हर दुख को अपनाकर हमे खुशी देता है

दोस्ती का रिश्ता बहुत गहरा होता है

हर रिश्ते से बड़ा रिश्ता दोस्ती का होता है।

 

गुलाब के फूल की तरह दोस्ती होती है

जो हर तरफ खुश्बू बिखेरती है 

दोस्ती में प्यार और तकरार दोनों होती है 

प्यार का दूसरा नाम दोस्ती है 

दोस्त हाथ थाम कर जिंदगी भर चलते है 

उन्हें ज़माने की परवाह नही होती

दोस्ती की‌ मजबूत डोर टूटती नही।


दोस्ती वफा है दोस्ती आशिकी है

दोस्ती के बिना जीवन वीरान है

दोस्ती साज है दोस्ती संगीत है 

दोस्ती गंगा सी पवित्र होती है  

दोस्ती के बिना जीवन अधूरा है

दोस्ती को मेरा मेरा शत-शत प्रणाम है।


✍️ गरिमा ( लखनऊ, उत्तर प्रदेश )

शनिवार, अगस्त 12, 2023

🍁 हारता इंसान 🍁









इंसान हार जाता है

कभी जिम्मेदारियों से

कभी हालातों से

मलता हाथों को

खुद को कोसता 

नही दिखता हल

मन मार जाता है

इंसान हार जाता है।


उम्मीद दूर भागती है

इच्छा दम तोड़ती है

अपने पराए बन

अपनो को डसते है 

नासमझ कुछ ना समझ

अकेला बड़बड़ाता है

इंसान हार जाता है।


नही करता भरोसा

ईश्वर के अस्तित्व पर

नही डरता फिर

किसी के श्राप से

हालात पर सब छोड़

अंततः आगे बढ़ जाता है

इंसान हार जाता है।

यक़ीनन

वो हार मान जाता है...!!


✍️ बबिता ओबराए ( कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश )

गुरुवार, अगस्त 10, 2023

💥 आधुनिकता और अंतर्मन में द्वंद युद्ध 💥









आज मेरा मेरे अंतर्मन से,

द्वंद युद्ध हो गया।

संस्कार और आधुनिकता पर,

आज मेरा पुनर्जन्म हो गया।


संस्कारों की दहलीज पर,

आधुनिकता का गृह प्रवेश हो गया। 

समय की धारा के साथ,

चलने का दृढ़ निश्चय हो गया।


स्मार्टफोन से मेरा,

चोली-दामन का साथ हो गया। 

मेरे नाजुक कंधों का भार,

कुछ हल्का हो गया।


घर बैठे ही फेसबुक पर मित्रों से,

मिलने का सिलसिला आरंभ हो गया।

इस आधुनिक नवीनीकरण में तो,

मेरी चौपाल का रूप भी नवीन हो गया।


मेरे बटुए का भार, 

अब हल्का हो गया। 

ऑनलाइन पैसों का,

आदान-प्रदान हो गया।


दुनियादारी से रिश्ता,

बेगाना हो गया। 

आधुनिकता का भूत,

कुछ इस तरह सवार हो गया।


✍️ रजनी वर्मा ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

सोमवार, अगस्त 07, 2023

💞 दो दिशाओ सा तेरा-मेरा प्रेम 💞









है पूरब और पश्चिम सी हमारी दिशाएं

जरा गौर से देखो ये दिन रात

ये बहती हवाएं है इश्क तुम्हारा 

सूर्य सा प्रकाशित करे हृदय को प्रफुल्लित 

ताप बढ़े जैसे बढ़ता ये भी वैसे है 

जितना ही पुराना होता उतना ही गहरा

सूर्य की किरणो पर कब हुआ है पहरा।


संग लालिमा के ये पश्चिम मे मिला है

क्षितिज मे कहीं वो प्रेम खिला है

पाकर जिसको अन्तर्मन का रूप निखरा है

है दो दिशाये ये प्रेम हमारा

है कितना खूबसूरत और कितना ही प्यारा

समझकर जरा कुछ इस तरह से समझो

कि पूरब से उगे जो प्रेम का सूरज

फैलाये प्रकाश करे उजियारा

सांझ तले ये प्रेम की लाली

पहुंचे जो पश्चिम बने रात की गहराई 

है प्रेम की परछाई ले ख्वाब अंगड़ाई। 


बन हया की लाली वो पूरब पर छाये

पूरब फिर मुस्कुरा कर नया सवेरा लाये

पश्चिम का प्रेम नया बनकर पूरब मे ही खिल जाये

तो बताओ भला कहाँ इश्क नया या पुराना रहा 

दोनो दिशाये मिलकर प्रेम का इक नया इतिहास बनाये

जिससे प्रेम अपने स्वरूप में अत्यधिक अद्भुत हो जाए।


✍️ प्रतिभा सागर ( शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश )

🌞 चेहरा मन का दर्पण 🌞









यह चेहरा मन का है दर्पण

उकेरता शिल्पी लौं मनोभावों को

मन निर्मल तो कांतिमय‌ ओ आभायुक्त

जो हो मलिन तो निस्तेज ओ निष्प्रभ।


लाख छिपाए सत्य नही छिपता

यह दर्पण मिथ्या नही बोलता

उभर आते जो मन की

अतल गहराइयों से

सौंदर्य प्रसाधन न ढक पाते

उन स्याह झांइयों को।


स्वच्छ करें मन के कलुष कोने

तो मृत त्वचा भी निखर जाएगी

मन की शुभ भावनाएँ

चेहरे पर रंगत ले आएगी

पर विडंबना यह है कि

धूल मन पर होती है 

और हम पोंछते हैं दर्पण।


✍️ कविता कोठारी ( कोलकाता, पश्चिम बंगाल )

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ के प्रतिभागी रचनाकार सम्मानित।

पुनीत अनुपम ग्रुप द्वारा सावन आगमन के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन ‘सावन सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जिसमें रचनाकारों को सावन ...