ऐ मेरे दिल तू
क्यूँ दूसरों के लिए
जीना चाहता है
इस दुनिया में नही कोई
तुझे समझने वाला
तू किसी के लिए
कितना भी कर ले
किसी को नही
परवाह तेरी
दिलों से खेलना
और तोड़ देना
ये है आदत
ज़माने की
कोई नही समझता
आज के युग में
कीमत तेरी
फिर क्यूँ खुद को
तकलीफ देता है
टूट कर फिर क्यूँ
छुप-छुप के रोता है
इसलिए कहती हूँ
अब तो संभल जा
खुद से प्यार कर ले
खुद पर ऐतबार कर ले
खुद अपनी आवाज सुन
खुद से मुलाकात कर ले
औरों की चिंता छोड़
मस्त रहना सीख ले
✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )






