बुधवार, मार्च 08, 2023

🐾 जवानी दीवानी होती है 🐾










जवानी

जीवन का 

सबसे हसीन 

समय होता है

जहां सपनो का‌ 

संसार होता है

खुद से खुद का 

प्यार‌‌ होता है


जवानी दीवानी होती है

इसकी अपनी कहानी होती है

किसी की चाहत में 

खो जाने का जी करता है

किसी को अपना 

बनाने का जी करता है

सपनो के आसमान में 

अरमानों के पंख लगाकर

उड़ने का जी करता है


जवानी में अक्सर

लड़खड़ा जाते है लोग

नशा जवानी का

कुछ ऐसा ही होता है।


✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )

🐾 प्रेम का अनूठा संगम 🐾










सांझ के दरीचे में

एक विंदशाइन तुम्हारे 

नाम का बाँध कर

हवा की हर छुअन

से बात करनी है मुझे

वो मध्यम-मध्यम

गूंजते तुम ध्वनि तरंगों

में विलीन होते जाते

जैसे कोई लहर वापस

समुंदर में खो जाए

पुलकित होती 

मन बगिया

रंगीली पौध है 

स्वप्निल प्रेम की

मैं श्वेत चाँदनी सी 

तुम को छू कर बिखर

रही पूरी धरा में

ये प्रेम का अनूठा संगम

छाया छुए हवा को

या हवा है छाया में गुम

अब क्या और कहूं

प्रेम के सारे रंगो से

सराबोर हो तुम...


✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )

🐾 बुढ़ापा जीवन का स्वर्णिम पड़ाव 🐾










जब से हुआ मुझे आत्मज्ञान,  

पा ली मैंने अपनी पहचान।


विलीन हुए सब मान-अभिमान, 

करती हूँ अनुभव अब मैं स्वमान।


एक अनुपम उपलब्धि का हो रहा बोध,

मन में न है अब कोई विरोध।


विचारों पर ना कोई प्रतिबंध,

उड़ाने भर रहा मन स्वच्छंद।


जीवन में आ गई है नई भोर, 

 प्रफुल्लता से मन हो रहा विभोर।


नकारात्मक सोच को जब दिया विराम,

सकारात्मक ऊर्जा तब हुई गतिमान।


सृजनात्मकता का हुआ जब प्रादुर्भाव, 

नवीनता का रहा न कोई अभाव।


समृद्ध अनुभवों का हुआ जब निवेश, 

अव्यक्त भावनाओं को मिला दिशा निर्देश।


परिपक्वता का मानती हूँ आभार,

असंख्य संभावनाओं के खुल गए द्वार।


समग्र क्षमताओं का हुआ विकास,

संतृप्त मन ने किया पूर्णता का एहसास।


अपरिमित आशाओं से भर उठा मन-प्राण,

मानो आत्मा को मिल गया हो त्राण।


बुढ़ापा जीवन का स्वर्णिम पड़ाव,

निरंकुश गति को देता ठहराव।


लगता है ज्यों कोई वरदान, 

मानो ईश्वर का हो अवदान।


 ✍️ कविता कोठारी ( कोलकाता, पश्चिम बंगाल )

मंगलवार, मार्च 07, 2023

👸धरती पर ईश्वर का रूप है मां 👸










मां से बढ़ कर दुनिया में 

कोई रिश्ता नही होता

ये वो रिश्ता है‌ जो दिल के 

सबसे करीब होता है


बच्चे चाहे कितने भी

बड़े हो जाएं

पर मां के लिए वो बच्चे हैं 

मां होती है तो जीवन में 

खुशियां ही खुशियां होती हैं 

ऐसा लगता है कि ढाल कोई 

हर पल साथ में रहती है


बचाने को हर संकट से

मां के आशीर्वाद का साया 

सदा रहता बच्चों के सर पर

हर दुख को खुद सहती है वो

बच्चों की खुशियों की खातिर


कभी नही मायूस होती

चाहे जितनी विपदा आए

हर दुख को सीने में छुपाकर

बच्चों को बहलाती है

तभी तो इस धरती पर मां

ईश्वर का रूप कहलाती है


✍️ मधु श्रीवास्तव ( प्रयागराज, उत्तर प्रदेश )

सोमवार, मार्च 06, 2023

👸 अबला सी नारी मैं 👸










अबला सी नारी मैं फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँ।

तन्हाइयों में खुद को गुनगुनाना सीख रही हूँ।


जो खुशियाँ कतरा कर निकल जाती थी करीब से,

अब उनको अपने दामन में छुपाना सीख रही हूँ।


तितलियों पर सवार होके जो उड़ जाते थे फुर्र से,

उन रंगों को जिन्दगी में सजाना सीख रही हूँ।


जो जज्बात गुजर गये दिल पर दस्तक दिये बगैर,

उन्हें फिर से दिल के आँगन में बुलाना सीख रही हूँ।


जो लम्हे निगल रहे थे मुझको न जाने कब से,

उन लम्हों में ही खुद को बचाना सीख रही हूँ।


भर भर के झोलियाँ बाँटती रही तमाम उम्र,

अपने लिये भी कुछ उनमें से चुराना सीख रही हूँ।


मुठ्ठी से सरक रही थी रेत की मानिन्द जिन्दगी,

अब फिर से जिन्दगी से भर जाना सीख रही हूँ।


✍️ शशि सिंह ( शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश )

रविवार, मार्च 05, 2023

👸 स्त्री मन का वो अनछुआ कोना 👸










स्त्री मन का वो कोना 

अनछुआ रह गया

जहाँ की हर दीवार

पर लिखावट थी 

अहसासों की

वो सारी गांठे 

बंधी रह गयी

जिनको बांधा था

मन्नतों के धागों से

वो तिमिर मिटा 

ही नही जिनकों

खिड़कियों ने कैद

कर लिया रोशनी 

से बचा कर

आज भी किसी

दस्तक के इंतजार में

अक्सर मन उसका

बेचैन चौखट पर

बैठ सोचता रहता है

क्या कभी वो रोशनी 

उतरेगी उन सीली सी

दीवारों पर और कोई 

पढ़ लेगा उन अहसासों

को जो अब मुरझाने

लगें हैं परत दर परत

अंधेरों की ओट में


✍️ सीमा मोटवानी ( अयोध्या, उत्तर प्रदेश )

शनिवार, मार्च 04, 2023

👸 सास-बहू का अनूठा रिश्ता 👸

सासू माँ अर्थात सास जो माँ जैसी हो। क्या हम सासुएँ इसे शब्दशः चरितार्थ करने में सफल हो पाती हैं ?
हम सभी चिरकाल से यह देखते आए हैं कि मानवीय रिश्तों में सास-बहू का रिश्ता सबसे कलुषित, कुपित व तिख्त रिश्ता माना जाता रहा है और यह मानसिकता हमारे समाज में कहीं डीप रूटेड है। सास युवतियों के मानस पटल पर एक खलनायिका की तरह अंकित हो जाती हैं और वे इस पूर्वधारणा के साथ ससुराल में कदम रखती हैं कि सास को प्लीज़ करना सिर्फ मुश्किल ही नही वरन असंभव है वगैरह वगैरह..... 
वहीं दूसरी तरफ सास आने वाली बहू को एक प्रतिद्वंदी के रूप में देखती हैं। आज तक जिस साम्राज्य पर उसका एकाधिकार था आज वह उसे छिनता हुआ नज़र आता है। ये वही हैं जिन्हें कल तक हम यह कहते सुनते थे कि - “मैं घर की इन नेवर एण्डिंग जिम्मेदारियों से तंग आ गई हूँ। बहू आए तो सब उसे संभलाकर मैं निश्चिंत होऊँ।
आप सभी मन ही मन सोच रहे होंगे कि मैडम आप किस ज़माने की बात कर रही हैं ? आज तो हम सासुएँ ही बहुओं से दबी रहती हैं। 
गौर किजिए कि क्या यह एक स्वाभाविक स्थिति है या एक असुरक्षित मन की प्रतिक्रिया, जो कि हम इस डर के फल स्वरूप करते हैं कि कहीं बेटे से हाथ ना धो बैठें।
आखिर क्यों हमारे नेक इरादों व सतत प्रयास के बावज़ूद भी हम एक अच्छी सास नही साबित हो पाती।
बहू के आने के पूर्व हम सभी एक आदर्श रिश्ते की परिकल्पना करते हैं जैसे कि - हम उसे खूब प्यार देंगे, बेटी की तरह रखेंगे आदि-आदि पर वास्तविक जीवन में क्रियान्वित नही कर पाती।
हमारे मन में प्रश्न उठता है कि आखिर हमसे कहाँ चूक हो जाती है ? क्या इसे हम सचमुच एक आदर्श रिश्ते में परिवर्तित नही कर सकते ?
सर्वप्रथम हमें सदियों से चली आ रही अपनी मानसिकता में बदलाव लाना होगा। हम आने वाली बहू से एक सुपर वूमेन होने की अपेक्षा रखते हैं और जब अपेक्षाओं पर वह खरी नही उतरती तब शुरू होती है ‘इगो टसल्स’ जिसके फलस्वरूप रिश्तों में दरारें आने लगती हैं।
हम बहू को एक इंडिविजुअल एंटिटी के रूप में देखें ना कि खुद की परछाई के रूप में। वह एक भिन्न परिवेश में, डिफ्रेंट वैल्यू सिस्टम में पली बढ़ी है अतः उसे हमारे परिवार के साथ तालमेल बैठाने के लिए कुछ वक्त देना होगा। 
यह तो हुई कुछ मोटी बातें जो सब पर लागू होती है पर यह भी ध्यान रखिए कि -“वन साइज डज़ंट फिट ऑल” क्योंकि हम सभी का व्यक्तित्व भिन्न है और जीवन के प्रति अप्रोच भी अलग-अलग।
हमें यह समझना होगा कि वे अपना सर्वस्व छोड़कर एक नए वातावरण में आती है और वे भी ससुराल से बहुत सारी अपेक्षाएँ रखती हैं। अतः हमें जजमेंटल न होकर खुले मन से उनका स्वागत करना होगा ताकि वे ऐट होम फील कर सकें। आइए इस तथाकथित कटु रिश्ते में हम मिठास भर दें -

“सभी रिश्तों में अनमोल हमारा-तुम्हारा रिश्ता।
 आओ इसे बनाएँ हम, एक आदर्श रिश्ता।”

✍️ कविता कोठारी ( कोलकाता, पश्चिम बंगाल )

🧩 भाग्य और संघर्ष 🧩

भाग्य प्रत्येक का, यहाँ भिन्न-भिन्न है।  जिसने जन्म लिया, इस पृथ्वी पर,  उसे स्वयं ही ज्ञात नही, उसके भाग्य में क्या है ?  परंतु प्रत्येक जी...