सोमवार, अगस्त 09, 2021

माँ का स्नेह

दिया स्नेह अपने बच्चों को माँ तूने
हर दर्द सहा बच्चों की ख़ातिर
ख़ुद गीले में सोकर सूखे में उन्हें रखा
रात दिन जाग जाग कर उसे सुलाया
ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया
स्नेह दिया अपार जब भी वो गिरा
हर ज़ख्म पर स्नेह का मरहम लगाया
सीख दी सच्चाई और प्यार की 
सही राह पर चलना सीखाया
अपना स्नेह लुटाती रही सब पर
माँ होना आसान नही है
भगवान का ही रूप होती है
हर दुख को पीती है 
माँ तो माँ होती है
स्नेह का गहरा सागर होती है
       
           ✍️ मीता लुनिवाल ( जयपुर, राजस्थान )

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