शुक्रवार, सितंबर 04, 2026

❤️ प्रेम और विश्वास ❤️








प्रेम कोई शब्द नहीं,

जो होंठों से कहा जाए,

प्रेम तो वह एहसास है,

जो ख़ामोशी में भी समझा जाए।


प्रेम है किसी की मुस्कान में

अपनी खुशी तलाश लेना,

उसकी आँखों में छिपे आँसू,

बिन कहे पढ़ लेना।


प्रेम है दूर रहकर भी,

दिल के पास बने रहना,

रिश्तों की भीड़ में,

किसी एक का ख़ास बने रहना।


न वादों की ज़रूरत,

न कसमें, न कोई शर्त,

जहाँ मन निःस्वार्थ हो जाए,

वहीं जन्म लेता है प्रेम।


प्रेम तो वह दीप है

जो आँधियों में भी जलता है,

और सच्चा हो अगर,

तो उम्र भर साथ चलता है।


✍️ रागिनी ठाकुर ( रायपुर, छत्तीसगढ़ )

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