तेरा-मेरा रिश्ता बड़ा अनमोल मैंने पाया है,
आज बरसों के बाद फिर ख्याल आया है,
मेरी जिंदगी में बहुत से दुखों का साया है,
इस दिल ने सनम फिर तुझे पुकारा है।
है माना मैंने तुझ पर सितम किए हैं कई,
मेरी जान तेरा-मेरा रिश्ता बड़ा अनमोल मैंने पाया है।
आज बरसों के बाद फिर ख्याल आया है,
इस दिल ने सनम फिर तुझे पुकारा है।
जिम्मेदारी का फर्ज ऐसा मैंने कुछ निभाया है,
ना वक्त दिया तुझको ना बच्चों से लाड-लडाया है।
दूर रहकर भी तेरा-मेरा रिश्ता देख कितना प्यारा है,
इस दिल ने सनम फिर तुझे पुकारा है।
मेरे घर में न होने पर भी तूने मेरा घर संभाला है,
मेरे मां-बाप भाई-बहन का तू ही तो अब वहां सहारा है।
सच्चे बंधन में बंधा तेरा-मेरा रिश्ता सबसे न्यारा है,
आज बरसों के बाद फिर ख्याल आया है,
इस दिल ने सनम फिर तुझे पुकारा है।
अर्धांगिनी के रूप में मैंने तो कोहिनूर पाया है,
इस दिल ने सनम तुझको हर पल पुकारा है।
जब साथी-संगी कोई ना काम आया है,
जब-जब गिरा ज़मीं पर तूने ही दिया सहारा है।
सात जन्मों की डोर से जुड़ा तेरा-मेरा रिश्ता सबसे न्यारा है,
तुझको देखूं मैं जब-जब ये दिल तड़पता बेचारा है।
आज बरसों के बाद फिर ख्याल आया है,
इस दिल ने सनम तुझको प्रतिपल पुकारा है।
✍️ अभिषेक सिंह कुशवाहा "अनभिज्ञ" ( पीलीभीत, उत्तर प्रदेश )

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