माँ, मुझको दुनिया में आने दो
अंधकार में पड़ी हुई हूँ
दुनिया से मैं डरी हुई हूँ
आशाओं से भरी हुई हूँ
मुझपर प्रकाश भी छाने दो
मुझको दुनिया में आने दो
जी चाहे तुझको छूँ ऊँ मैं
तेरी गोदी में खेलूँ मैं
तेरी बाहों के झूले में
भाई की तरह ही झूलूँ मैं
मुझको गोदी में लेकर तुम
खुद को लोरी गाने दो
मुझको दुनिया में आने दो
क्यों भाई को सौभाग्य मिला
मेरे हिस्से क्यों "त्याज्य" मिला
जितना वह अंश तुम्हारा है
मैं भी उतनी ही तुम्हारी हूँ
यदि वह आँखों का तारा है
मैं भी गोदी की दुलारी हूँ
दुनिया समझे या ना समझे
हर माँ को यह समझाने दो
मुझको दुनिया में आने दो
बेटे ने भी पीड़ा दी है
फिर भी उसने ममता ली है
माँ मैंने क्या अपराध किया
फिर सारा हक़ क्यों उसे दिया
अपने आंचल की छाया में
माँ मुझको भी सो जाने दो
मुझको दुनिया में आने दो
आँखों पर बंधी पट्टी खोलो
मेरी पुकार सुन कुछ बोलो
तुमसे मैं वादा करती हूँ
सच मानो जो मैं कहती हूँ
जीवन भर साथ निभाऊंगी
तेरे दूध का कर्ज चुकाउंगी
इतना तो यकीन दिलाने दो
मुझको दुनिया में आने दो
मैं तो धरती का बीज हूँ माँ
फिर क्यों तुम सब की खीझ हूँ माँ
तुम भी तो किसी की बेटी थी
माँ की बाहों में लेटी थी
यदि बेटी नही बचेगी माँ
तो सृष्टि कौन रचेगी माँ
यह दुनिया को समझाने दो
माँ, मुझको दुनिया में आने दो
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )






