सोमवार, अक्टूबर 19, 2026

🌻 माँ 🌻









माँ, माता या जननी ये मात्र शब्द नही,

अनन्त धाराओं से समेकित मंदाकिनी है।

जिसकी हर एक धारा समृद्ध है ममत्व, प्रेम,

त्याग, तप से और अनिर्वचनीय गुणों की स्वामिनी है।


इसके अंश की व्युत्पत्ति से प्रकृति में,

जीवन के अस्तित्व ने अपना स्वरूप पाया है।

हर प्राणी, जीव और जंतु में माँ की रचना कर,

परमात्मा ने स्वयं का आभास कराया है।


दिव्यतम आशीष है माँ हर ललाट पर,

बनकर अक्षत, रोली और चंदन।

गुरुत्व का श्री गणेश माँ से ही होकर,

ज्ञान का करता अतुलित सर्जन है।


कौशल्या, देवकी और यशोदा से अनुसईया तक,

अनेको रूपों को माँ ने ही शोभित किया है।

स्निग्धता से अभिसिंचित किया ईश को भी,

अवतरण ले जब-जब उन्होंने मानव हित किया है।


माँ व्याख्या और व्यंजना दोनों से परे,

अनुभूति का अद्भुत और अक्षय संसार है।

मेरी कलम की सामर्थ्य नही जो माँ पर लिखूँ,

ये 'अनुराग' के अबोध अंतर्मन के उद्गार हैं।


 ✍️ डॉ० अनुराग पाण्डेय ( कानपुर, उत्तर प्रदेश )

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