सोमवार, अक्टूबर 19, 2026

🌺 अल्फाज़ो की कीमत 🌺









तेरे ख्वाबों, ख्यालों के अलावा 

मुझे अल्फाज़ सूझते कहाँ है

कि कागज के जिस्म पर कुछ लिख पाऊं 

तेरी मोहब्बत स्याही है मेरी कलम की

स्याही नही तो कलम की औकात क्या है


तूने न जानी हो चाहे 

मोहब्बत अपनी

मगर तेरी मोहब्बत की

हर धड़कन को

मैं पहचानती हूँ

न किया तूने जिक्र कभी

अपनी मोहब्बत का मेरे लिए

मगर तेरे सीने में धड़कती

हर आह का राज मैं जानती हूँ


कैसे बताऊ तुझे

क्या है तू मेरे लिए

ऊपर वाले को तेरे बाद

माना है मैने

तेरी रूह की इबाबत की है मैने

अपनी मोहब्बत को तू 

पहचानेगा कैसे, मानेगा कैसे 

ये तो वक्त तय करेगा


मगर तेरी मोहब्बत को

जिंदगी भर लिखती रहूँ 

अल्फाज़ो के मोती में पिरोकर 

बन जाए अल्फाज़

मेरे हर पढ़ने वाले के लिए

मरहम जिंदगी के हर गम का

बस अपनी जिंदगी से यही

अपने अल्फाज़ो की कीमत मांगती हूँ।


 ✍️ अंजुलिका खोखर ( उत्तर पूर्वी, दिल्ली )

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