जैसे बंजर हो चुकी भूमि में
फसलों की हरियाली छाई
घर की रौनक लाडली बेटी
जब गोद में मेरी तुम आई
देखा जब पहली बार तुझे
चूमा जब पहली बार तुझे
तेरी नन्ही-नन्ही अंखियों में
दिखा सारा संसार मुझे
खुशियां आंखों में भर आई
जब गोद में मेरी तुम आई
तेरा वह ठुमक ठुमक चलना
कभी गिरना और फिसल पड़ना
मेरी बाहों में तू झूल गई
मैं सारी दुनिया भूल गई
ममता आंखों में सिमट आई
जब गोद में मेरी तुम आई
कंधे पर पापा के खड़ी हुई
बोली पापा मैं बड़ी हुई
कब मेरा ब्याह रचाओगे
कब मेरा गुड्डा लाओगे
तेरी इन भोली बातों पर
पापा की अखियां मुस्काई
जब गोद में मेरी तुम आई
जाने कब वक्त निकल गया
मानो मुट्ठी से फिसल गया
हो गई सयानी तू गुड़िया
जाएगी अपने घर बिटिया
यह सोच के ऑंखें भर आई
जब गोद में मेरी तुम आई
पापा की परी ससुराल चली
मां के सपनों को संभाल चली
ममता का आंचल छोड़ चली
सूनी कर गई अम्मा की गली
ससुराल में तू ही तू छाई
जब गोद में मेरी तुम आई
मेरा मान है तू सम्मान है तू
मेरे जीवन का अभिमान है तू
मेरी सांसें है मेरे प्राण है तू
मेरी खुशियां है मेरी जान है तू
मेरे होठों की मुस्कान है तू
ईश्वर का दिया वरदान है तू
इस दिल को तू ही तू भाई
जब गोद में मेरी तुम आई
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )

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