जीवन में संगति बड़ी, रखती अपना मान।
अच्छी संगति मान दे, बुरी करे अपमान॥
अच्छी संगति मान दे, बुरी करे अपमान॥
सत्संगति अमृत-घट, मन में भरे प्रकाश।
सदविचार जीवन सँवारें, मिटे हृदय की प्यास॥
अच्छी संगति गंग सम, निर्मल करती चित्त।
बुरी संगति नाले सम, मैला करती चित्त॥
कोयले की संगति से, सीखो जीवन-सार।
गर्म मिले तो हाथ जले, कालिख लगे अपार॥
जैसी संगति कीजिए, वैसा पड़े प्रभाव।
सत्संगति सुख बाँटती, कुसंगति दे घाव॥
मित्र वही जो राह में, दे सदमार्ग का ज्ञान।
कुसंगति में पड़कर नित, खोता मत सम्मान॥
संगति से बनता चरित्र, संगति से व्यवहार।
अच्छे गुण अपनाइए, जीवन हो उजियार॥
कोयला तपता आग में, हाथ जलाए साथ।
ठंडा होकर भी करे, काला अपना हाथ॥
संगति चुनिए सोचकर, रखिए मन में ज्ञान।
सही-गलत पहचानकर, बढ़े मनुज की शान॥
सज्जन का सान्निध्य ही, जीवन का उपहार।
सत्य, प्रेम, सदभाव से, महके घर-संसार॥
संगति का सम्मान कर, चुनिए उचित विचार।
अच्छे कर्मों से बने, जीवन सुखद अपार॥
✍️ पूनम लता ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

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