मेरी सफलता पर वो खूब मुस्कुराए,
मेरी असफलता पर भी मेरी पीठ थपथपाए।
मेरी छोटी-सी खुशी में अपनी खुशियाँ ढूँढे,
मेरे हर आँसू को अपनी पलकों में समाए।
जीवन के हर कठिन मोड़ पर,
वो मेरी सारथी बन मुझसे आगे नज़र आए,
जब रास्ते धुंधले हो जाएँ मेरे,
वो बनकर रोशनी मुझे राह दिखाए।
जीवन की हर परेशानी में,
वो मेरे पास आकर समझाएं,
मेरी खामोशी को भी पढ़ लें वो,
बिन कहे मेरे मन की बात समझ जाएँ।
जब दुनिया मेरी हिम्मत तोड़ने लगे,
वो मेरा हौसला बनकर सामने आए,
मेरी हर हार के बाद,
फिर से जीतने का जज़्बा जगाए।
मेरी हर छोटी कोशिश पर,
वो गर्व से मुस्कुराए,
मेरे सपनों को अपना समझकर,
हर कदम पर मेरा साथ निभाए।
जिसकी दुआओं से मेरी राहें आसान हों,
जिसकी ममता से हर ग़म बेईमान हो जाए,
जिसको देखने मात्र से,
जीवन में एक नई उमंग भर आए।
वो सिर्फ़ मेरी माँ नही,
मेरी ताकत, मेरी दुआ, मेरा विश्वास है,
मेरी हर जीत के पीछे,
उसका ही तो आशीर्वाद खास है।
जो मुझे गिरकर भी संभलना सिखाए,
जो मुझे खुद से पहले दुनिया समझाए,
जो हर हार के बाद भी मेरा हौसला बढ़ाए,
मुझे मेरा पहला गुरु मेरी माँ में ही नज़र आए।
✍️ प्रियंका पुष्करणा ( चित्तौड़गढ़, राजस्थान )

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