सोमवार, अक्टूबर 12, 2026

🍁 नसीब भी खुद बनाया जा सकता है 🍁








मेहनत को आदत बनाकर,

नसीब खुद लिखा जा सकता है।

बदलते युग में थोड़ी हिम्मत से,

यह करिश्मा कोई भी दिखा सकता है।


सबका नसीब अपना-अपना होता है,

किसी के नसीब में खोना होता है।

किसी के नसीब में पाना होता है,

किसी को नसीब खुद बनाना होता है।


याद रखना ! रास्तों की मुश्किलों से घबराकर,

लक्ष्य को कभी नही पाया जा सकता है।

जो-हो कर्मों से मंजिल पाने को आतुर,

तो नसीब को भी झुकाया जा सकता है।


बुलंद हौंसलो से मंजिल को पाया जाता है,

नसीब के इम्तेहां को आजमाया जाता है।

घोड़े बेचकर सोये नसीब को अक्सर,

कर्म की लाठी मार-मार जगाया जाता है।


कर्मठता, जूनून, दृढ़ निश्चय,

सकारात्मक सोच के साथ,

इरादे अगर नेक हो तो,

कुछ भी पाया जा सकता है।

कोशिश पे कोशिश करके,

नसीब भी खुद बनाया जा सकता है।


✍️ रत्ना वाधवानी ( भोपाल, मध्य प्रदेश )

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