सोमवार, अक्टूबर 12, 2026

✨ नसीब ✨








जिसके नसीब में जो होता,

वही उसके हिस्से आता,

किसी के हिस्से में रोशनी,

तो किसी के हिस्से अँधियारा छाता।


कौन बड़ा, कौन छोटा है,

कहना इतना आसान नही,

नसीब की अपनी राह सही,

पर कर्मों से बढ़कर कुछ नही।


मेरे नसीब में क्या लिखा है,

यह तो खुदा ही जानता है,

जिसने मेरा भाग्य लिखा,

वही उसका राज़ जानता है।


अच्छी बनने की कोशिश की,

फिर भी नसीब बुरा रहा,

दिल से जिंदादिली अपनाई,

पर वक्त मेरे खिलाफ रहा।


मेरा हर सपना अधूरा रहा,

शायद यही मेरा नसीब था,

आँखों में पलते अरमानों का

जैसे टूटना ही नसीब था।


इस जन्म में मिले जो दर्द,

शायद कर्मों का हिसाब हैं,

मन में उठते कई सवालों के

कहाँ कोई सीधे जवाब हैं ?


कभी-कभी मन कहता है —

कर्मों से नसीब बदल दूँगी,

ठोकर चाहे जितनी मिले,

फिर भी राह नई चुन लूँगी।


सतत प्रयत्नशील रहकर मैं,

उद्यमी बनती चली गई,

पूरा न सही, थोड़ा-सा ही,

तकदीर बदलती चली गई।


शायद वह छोटा-सा बदलाव भी,

मेरे नसीब में लिखा था,

मेरी मेहनत, मेरा हौसला —

शायद यही मेरा नसीब था।


सत्य यही है— जिसके हिस्से,

जो लिखा, वही सामने आया,

किसी के आँगन बहार उतरी,

किसी के हिस्से जाम आया।


पर नसीब की राहों में भी,

कर्मों का दीप जलाना है,

जो लिखा है, उसे स्वीकार कर,

जो बदला जा सके, वह बदलते जाना है।


✍️ पूनम लता ( नोएडा, उत्तर प्रदेश )

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