रचनाकारों, कलाकारों, प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली शख्सियतों को प्रोत्साहित करने का विशेष मंच।
समेट कर रख दिए
आज मैंने
सारे जज़्बात
कोने में,
इश्क़ था
तो बता देते
बहुत देर कर दी
मेरा होने में,
मसले ही
कुछ ऐसे रहे हैं
बैचेनी
बढ़ती रही ताउम्र,
समय बहुत लगता है
हर रोज
नींद को ख़्वाब बोने में।
✍️ डॉ० सोहन पाल 'मज़ार' (मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश)
दृढ़ प्रतिज्ञा और परिश्रम से विश्व में नाम कमाया है स्वर्ण पदक लाकर के जीवन सफल बनाया है, जो हमसे टकराया है वह आजीवन पछताया है, नारी शक्त...
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