शनिवार, अक्टूबर 10, 2026

❤️ जज़्बात ❤️








समेट कर रख दिए 


आज मैंने 


सारे जज़्बात 


कोने में,


इश्क़ था 


तो बता देते 


बहुत देर कर दी 


मेरा होने में,


मसले ही 


कुछ ऐसे रहे हैं 


बैचेनी 


बढ़ती रही ताउम्र,


समय बहुत लगता है 


हर रोज 


नींद को ख़्वाब बोने में।


✍️ डॉ० सोहन पाल 'मज़ार' (मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश)

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