साबरमती का संत निराला,
चलाई उसने ऐसी आंधी।
चारो ओर था एक ही शोर,
मोहन दास करमचंद गाँधी।
सत्य भरा, सादा जीवन,
भारतीयों को भाया था।
बिन खून खराबे के उसने,
देश आजाद कराया था।
फूँक बिगुल आजादी का,
अहिंसा की राह चला था।
हिन्दू मुस्लिम, सिक्ख ईसाई,
इसके हर कोई संग चला था।
दुबली काया, क्या कर सकती,
उसने दुनिया को दिखा दिया।
एक धोती एक लाठी के बल,
अंग्रेजी शासन को हिला दिया।
राष्ट्र पिता उन्हें नाम मिला था,
हम सब के प्यारे बापू थे।
संत, महात्मा भी कहलाते,
ऐसे हमारे प्यारे बापू थे।
✍️ संध्या शर्मा ( मोहाली, पंजाब )

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