शनिवार, अक्टूबर 03, 2026

👩‍🎓 जागरुक नारी 👩‍🎓








सवाल पूछती जागरुक नारी 

क्या नारी को बात-बात पर टोकना 

है बस क्या यही दुनियादारी 


तुम नारी हो पल्लू में रहो

ज्यादा तो क्या, कुछ न कहो

अन्याय को चुपचाप सहो

तुम नारी हो पल्लू में रहो


एक बात सुनो लगा के ध्यान 

तानों से झुक जाने वाली 

नही रही नारी की पहचान

चार बात सुना के जाना

तुम्हारे लिए होगा आसान 

पर कड़ी निंदा सुन, चुप रह जाए 

इतनी अब वो नही नादान 


नारी नही किसी की संपत्ति

नारी से ही वंश की उत्पत्ति

नारी ने ही वंश बढ़ाया सबका 

अपना अस्तित्व खोकर घर सजाया सबका


सीधी बात अब नारी नही बेचारी है

वो समाज के लिए कल्याणकारी है 

इसलिए सवाल पूछने की उसकी बारी है


✍️ प्रियंका पुष्करणा ( चित्तौड़गढ़, राजस्थान )

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