शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

💐 कैसे बांधू एक रिश्ते में 💐








कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।

मन का जिससे भाव जुड़ा,

वो इतना प्यार नाता है।


ऐसा अनोखा रिश्ता प्यारा,

हर रिश्ते का प्रेम समाया है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कभी डांटे मात-पिता सा,

कभी भाई-बहन सा झगड़ा होता है।

कोई ना ले सकता है जगह को उनकी,

इनके आलिंगन से गम सारा मिटता है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


तेरे-मेरे रिश्ते के खातिर कई बार तो,

प्रियतमा का फोन भी काटा है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कभी भड़कते बॉस के जैसे,

कभी सहकर्मी की बातों का बटर मसाला है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


बीमारी का गर पता लगे,

तो डॉक्टर नर्स भी बन जाते हैं।

ज्ञान वाचने का मन हो इनका,

ब्रह्म गुरु हो जाते हैं।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


कई रिश्तों का अपनापन, 

जिस एक रिश्ते ने अपनाया है।

यह है वही प्यारा सा बंधन,

जो दोस्ती कहलाया है।

कैसे बांधू एक रिश्ते में,

दस मनको की माला है।


✍️ अभिषेक सिंह कुशवाहा "अनभिज्ञ" 

           ( पीलीभीत, उत्तर प्रदेश )

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

📜 कागज़-कलम वार्ता 🖋️

कागज़ ने कलम से कहा, “तुम मन की आवाज़, मैं मौन साधना में लिपटा, तुम शब्दों का साज़। तुम बूँद विचारों की हो, मैं धरती का वक्ष, मिलकर हम रचते ...