शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

🙍‍♀️ क्यों किसी को… 🙍‍♀️








क्यों किसी को प्यार के बदले, 

प्यार नही मिलता है।

कोमल हृदय, भावनाओं से भरे हो, 

फिर भी चाहत का उपहार नही मिलता है।


झुलसते-तड़पते दिल पर कभी भी,

पड़ी नही प्रीत की बारिशें।

घुट-घुट कर रह गये अरमान, 

और अधूरी रह गई ख्वाहिशें।


चाहा जिसे दिलो-जान से वो, 

जाने क्यों बिछड़ जाता है।

रह जाता मन का आंगन खाली, 

और पंछी उड़ जाता है।


कैसे ये प्यार के रस्मों-रिवाज हैं,

पागल मन में समाए ना।

कितनी बेरहम पाबंदियां हैं, 

दिल इससे निकल पाए ना।


क्यों किसी को कभी जीवन में,

प्यार मुकम्मल नही मिलता।

मिलते हैं हजारों आंसू मगर,

एक मिलन का पल नही मिलता।


रीत है कैसी यह, 

क्यों दूरी बन जाती है ?

दिलवालों की किस्मत,

क्यों सदा अधूरी रह जाती है ?


✍️ डोली पाठक ( पटना, बिहार )

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