स्त्री का सौंदर्य उसकी देह नही है,
एक बहुत सुंदर शजर है,
जिसमें सुन्दरता के सारे आयाम हैं।
यदि आपका नज़रिया समझता है समर्पण,
यदि साँसें समझती हैं सुकूं,
तो स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
पैरों में पड़ी रिश्ते की अदृश्य बेड़ियां,
ज्यों ही तुम्हें अनुभव होता है कभी दर्द का,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
बाप के घर का हिस्सा उसके लिए किस्सा,
फिर भी उसकी नवाजिश यदि तू देख पाएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
तेरे बीमार होते ही उसका हाथ माँ जैसा बन जाएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री सौंदर्य नज़र आएगा..!!
वह स्त्री ही है जो थोड़ा-सा सम्मान मिलने भर से,
हर रिश्ता बरकरार रखती है,
सिर्फ़ एक दिन निभाओगे उसका किरदार जो तुम,
तो तुम्हें स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
जिसके आने से घर में दया करुणा और प्रेम आएगा,
तो ही तुम्हें स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा..!!
मजबूत विचारों वाली महिला,
पुरुष प्रधानता से कभी नही हारती,
जिस दिन तू यह बात समझ जाएगा,
उस दिन तुझे स्त्री का सौंदर्य नज़र आएगा।
✍️ डॉ० सोहन पाल 'मज़ार' (मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश)